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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अभिलेख न्यायालय (Court of Record) के रूप में स्थिति और न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है, जिसका अर्थ है कि उसके सभी निर्णयों, अभिलेखों और कार्रवाइयों को साक्ष्य के रूप में स्थायी मान्यता प्राप्त होती है और देश के किसी भी न्यायालय में उनके विधिक मूल्य पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।
- 2. उच्चतम न्यायालय को संविधान के तहत न केवल अपनी अवमानना के लिए, बल्कि देश के उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए भी दंडित करने की व्यापक और पूर्ण शक्ति प्राप्त है।
- 3. 'न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971' के प्रावधानों के तहत सिविल अवमानना (Civil Contempt) का तात्पर्य उच्चतम न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री, आदेश या रिट का जानबूझकर उल्लंघन करना है, जबकि आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के अंतर्गत ऐसा कोई प्रकाशन या कार्य शामिल है जो उच्चतम न्यायालय के प्राधिकार को कम करता है या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है, जिसके सभी निर्णयों और अभिलेखों को साक्ष्यात्मक मूल्य प्राप्त होता है और उन पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 129 के तहत उच्चतम न्यायालय को केवल अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति है, देश के उच्च न्यायालयों की अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति उच्च न्यायालयों (अनुच्छेद 215) के पास होती है, न कि सीधे उच्चतम न्यायालय के पास। कथन 3 सही है; 'न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971' के तहत सिविल अवमानना न्यायालय के आदेशों के जानबूझकर उल्लंघन से संबंधित है, जबकि आपराधिक अवमानना न्यायिक प्राधिकार को कम करने वाले कृत्यों या प्रकाशनों से जुड़ी है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों, अंतर-राज्यीय परिषद् तथा जल विवादों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकहित में अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्रदान की गई है, और यह परिषद् केवल राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और उन पर सलाह देने का कार्य करती है, न कि केंद्र और राज्यों के बीच के विवादों पर।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् की संरचना में प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्यक्षेत्रों (जहाँ विधानसभाएँ हैं) के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं, तथा प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त केंद्रीय मंत्रिपरिषद के 6 कैबिनेट मंत्री भी इसके स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
3. संसद को संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के पानी के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन (Adjudication) के लिए प्रावधान कर सकती है, और इस अनुच्छेद के तहत संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के अधीन उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली 'रिट्स' (Writs) की शक्तियों और उनके अनुप्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अवैध नजरबंदी से मुक्त कराना है, और यह रिट केवल किसी सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) के विरुद्ध ही जारी की जा सकती है, निजी व्यक्तियों के विरुद्ध नहीं।
2. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) की रिट किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जारी की जाती है जो किसी लोक पद पर अवैध रूप से आसीन हुआ है, और इस रिट को दायर करने के लिए याचिकाकर्ता का उस पद से सीधे प्रभावित होना या aggrieved होना अनिवार्य नहीं है, इसे कोई भी तीसरा व्यक्ति भी अदालत में ला सकता है।
3. उत्प्रेषण (Certiorari) और प्रतिषेध (Prohibition) दोनों ही रिट्स केवल न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, और इन्हें किसी भी प्रशासनिक प्राधिकारी (Administrative Authority) के खिलाफ जारी नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की प्रशासनिक नियंत्रण शक्ति, रिट अधिकारिता और अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अधीन प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण (Superintendence) की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति न्यायिक अधीक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक अधीक्षण को भी समाहित करती है, जिसे राज्य के विधि द्वारा भी छीना नहीं जा सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार, किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति का अधिकार सीधे राज्यपाल के पास निहित है, किंतु राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श किए बिना भी अपनी मंत्रिपरिषद की सलाह पर कर सकता है।
3. अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी अन्य विधिक उद्देश्य (Other Purpose) के लिए भी प्रयोग की जा सकती है, और यह उच्च न्यायालय का मूल तथा विवेकपरक क्षेत्राधिकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद संशोधन प्रक्रिया (Amendment Procedure) का वर्णन करता है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई मताधिकार प्राप्त नहीं होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित किए जाने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, भले ही प्रधानमंत्री स्वयं इसके पक्ष में हों या लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर चुके हों।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्ताव संबंधी मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई जानकारी मांगें तो उसे भी प्रदान करें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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