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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों, अंतर-राज्यीय परिषद् तथा जल विवादों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकहित में अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्रदान की गई है, और यह परिषद् केवल राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और उन पर सलाह देने का कार्य करती है, न कि केंद्र और राज्यों के बीच के विवादों पर।
- 2. अंतर-राज्यीय परिषद् की संरचना में प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्यक्षेत्रों (जहाँ विधानसभाएँ हैं) के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं, तथा प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त केंद्रीय मंत्रिपरिषद के 6 कैबिनेट मंत्री भी इसके स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
- 3. संसद को संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के पानी के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन (Adjudication) के लिए प्रावधान कर सकती है, और इस अनुच्छेद के तहत संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के अधीन उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 263 के तहत स्थापित अंतर-राज्यीय परिषद् का कार्य न केवल राज्यों के आपसी विवादों की जाँच और सलाह देना है, बल्कि ऐसे विषयों पर भी विचार करना है जिनमें राज्यों तथा संघ (केंद्र) के सामान्य हित हों। अतः यह केवल राज्यों तक सीमित नहीं है। कथन 2 सत्य है क्योंकि अंतर-राज्यीय परिषद् के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, सभी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं, साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट के 6 मंत्री भी इसके सदस्य होते हैं। कथन 3 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान के लिए विशेष कानून बनाने की शक्ति देता है और संसद विधि द्वारा यह प्रावधान कर सकती है कि ऐसे विवादों में उच्चतम न्यायालय या कोई अन्य न्यायालय अपनी अधिकारिता का प्रयोग न करे। परीक्षा के विस्तृत और गहन अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अवलोकन करें।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही परिवर्धित रूप में भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें मूल रूप से भारत को एक 'संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य' घोषित किया गया था।
2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांस की क्रांति (1789) से लिया गया है।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके माध्यम से संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुंचे, जिसका एकमात्र उदाहरण 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों का जोड़ा जाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' और 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया, तथा उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसमें निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते थे और गवर्नर-जनरल को केवल निर्णायक मत (casting vote) देने का अधिकार था।
2. रेगुलेटिंग एक्ट के तहत ही वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे, और इस न्यायालय की अपीलें सीधे तौर पर कलकत्ता स्थित गवर्नर-जनरल की परिषद में की जा सकती थीं, न कि ब्रिटेन की प्रिवी कौंसिल में।
3. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल' (Board of Control) और व्यापारिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई, जिससे भारत में 'द्वैध शासन' (Double Government) की प्रणाली प्रारंभ हुई।
4. पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से ही पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को आधिकारिक रूप से 'ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र का भारतीय क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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पंचायती राज व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य कौन सा था?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के वैधानिक और ऐतिहासिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार भारत का नाम 'इंडिया, अर्थात भारत' (India, that is Bharat) राज्यों का एक संघ होगा, जिसमें 'राज्यों का संघ' (Union of States) शब्द का प्रयोग डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए किया गया था कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का अधिकार नहीं है।
2. अनुच्छेद 2 संसद को ऐसी शर्तों और निबंधनों पर जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने या उसके नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान करता है, और इस प्रकार के विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बाद ही संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है, साथ ही संबंधित राज्य विधानमंडल का विचार राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है।
3. अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश या मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने के लिए बनाई गई विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानून संसद द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किए जा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों के लिए ब्रिटिश भारत के प्रांतों से चुनाव हुए थे, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, जबकि रियासतें (Princely States) अपनी स्वेच्छा से संविधान सभा में शामिल होने के कारण शुरुआती दौर में इस निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा थीं।
2. संविधान सभा के प्रथम सत्र (9 दिसंबर 1946) का मुस्लिम लीग द्वारा बहिष्कार किया गया था, जिसके कारण सभा के अस्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया, जो सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे, और यह फ्रांसीसी प्रथा पर आधारित था।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण हेतु कुल 22 प्रमुख समितियों का गठन किया गया था, जिसमें संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे, जिसमें कुल सदस्यों की संख्या अध्यक्ष सहित सात थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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