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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके क्रियान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यदि संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा कोई कानून बनाया जाता है और वह कानून अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह इन मूल अधिकारों को सीमित करता है (यह प्रावधान 25वें संविधान संशोधन, 1971 द्वारा जोड़ा गया था)।
  2. 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन के संतुलन चक्र (Balance Wheel) पर टिकी है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर सर्वोच्चता देने से संविधान का मूल ढांचा प्रभावित होता है।
  3. 3. अनुच्छेद 44 के तहत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, तथा गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ संविधान लागू होने के समय से ही पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 के रूप में साझी सिविल संहिता लागू है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूरी तरह से सही हैं। प्रथम कथन के अनुसार, 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 31C जोड़ा गया जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के क्रियान्वयन हेतु बनाए गए कानून अनुच्छेद 14 और 19 के उल्लंघन के आधार पर शून्य नहीं होंगे। दूसरा कथन सही है क्योंकि 'मिनर्वा मिल्स मामले' (1980) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया था कि मौलिक अधिकार और DPSP एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच संतुलन संविधान की मूल विशेषता है। तीसरा कथन भी सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता से संबंधित है और गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड के रूप में एक समान नागरिक कानून पहले से ही अस्तित्व में है। राज्य व्यवस्था और संविधान से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से पढ़ने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत उल्लिखित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) की न्यायसंगतता, प्रवर्तनीयता और विभिन्न अनुच्छेदों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और यह राज्य का कर्तव्य होगा कि वह इन तत्वों को कानून बनाने में लागू करे, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, अर्थात् इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के क्रियान्वयन के लिए बनाई गई विधियों को अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता, और यह सुरक्षात्मक प्रावधान मूल संविधान में ही अंतर्निहित था जिसे किसी भी संविधान संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया था। 3. संविधान के अनुच्छेद 48A के अनुसार राज्य, देश के पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन तथा वन और वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा, और इस निर्देशक तत्व को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? लोकसभा के अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र किसे संबोधित करना होता है? अनुच्छेद 32 को आत्मा किसने कहा? कैबिनेट मिशन कब भारत आया? संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'अस्पृश्यता का उन्मूलन' करता है?
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