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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों, कूटनीतिक शक्तियों तथा आपातकालीन प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 77 के अनुसार भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से हुई कही जाएगी और राष्ट्रपति के नाम से बनाए गए और निष्पादित आदेश तथा अन्य दस्तावेज ऐसे नियमों के अनुसार प्रमाणित किए जाएंगे जो राष्ट्रपति द्वारा बनाए जाएं।
  2. 2. राष्ट्रपति देश के सभी कूटनीतिक (Diplomatic) मामलों में सर्वोच्च प्राधिकारी होता है, जिसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और समझौते राष्ट्रपति के नाम से ही किए जाते हैं, किंतु वे संधियाँ तब तक भारत पर बाध्यकारी नहीं होतीं जब तक कि संसद द्वारा विधि बनाकर उनका अनुमोदन न कर दिया जाए।
  3. 3. अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा के लिए मंत्रिपरिषद का लिखित परामर्श राष्ट्रपति के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है, और इस उद्घोषणा का अनुमोदन संसद के दोनों सदनों द्वारा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा एक माह के भीतर किया जाना अनिवार्य है।

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 77 के अंतर्गत भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के नाम से की जाती है और इसके प्रमाणीकरण के नियम राष्ट्रपति द्वारा बनाए जाते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और समझौते राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं, किंतु सभी संधियों के लिए संसद द्वारा कानून बनाना अनिवार्य नहीं होता; कार्यपालिका की संधि-निर्माण शक्ति और उसके क्रियान्वयन की सीमाएँ अलग होती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा के अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत नहीं, बल्कि संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) की आवश्यकता होती है, और इसके लिए समय-सीमा उद्घोषणा की तारीख से एक माह के स्थान पर 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा एक माह से घटाकर एक माह की अवधि को ध्यान में रखते हुए मूल रूप से एक मास निर्धारित की गई थी, किंतु यहाँ बहुमत का प्रावधान 'विशेष बहुमत' है। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था देखें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता से संबंधित कानूनी पहलुओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों के तहत भारत का नागरिक है या समझा जाता है, वह संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा, जिसका अर्थ यह है कि संसद साधारण बहुमत या विशेष बहुमत से बनाए गए कानूनों के माध्यम से किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी विधายक प्रक्रिया के मनमाने ढंग से समाप्त कर सकती है। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय नागरिकता को पाँच अलग-अलग तरीकों से अर्जित किया जा सकता है: जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण और राज्यक्षेत्र का भारत में समामेलन। 3. अनुच्छेद 8 के अंतर्गत भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों को नागरिकता के पंजीकरण का अधिकार दिया गया है, बशर्ते वे उस देश में स्थित भारत के कूटनीतिक या कौंसular प्रतिनिधि को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन दें और संबंधित प्रतिनिधि द्वारा उनका पंजीकरण किया जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य निर्वाचन आयोग का कार्य क्या है? भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान गवर्नर जनरल काउंसिल के विधि सदस्य के रूप में कौन नियुक्त हुआ था ? राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की विधाई शक्तियों तथा उनकी आपसी अंतःक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार यदि विधान परिषद किसी सामान्य विधेयक को पारित करने से अस्वीकार कर देती है या ऐसा संशोधन करती है जिससे विधानसभा सहमत नहीं होती है, तो विधानसभा उस विधेयक को दोबारा पारित करके जब दूसरी बार विधान परिषद के पास भेजती है, तो विधान परिषद अधिकतम एक माह की अवधि तक ही उस विधेयक को रोक सकती है। 2. किसी राज्य की विधान परिषद में धन विधेयक (Money Bill) को पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, और यदि विधानसभा द्वारा कोई धन विधेयक पारित करके विधान परिषद में भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास यह शक्ति होती है कि वह उस पर अपनी संस्तुति दे सके, किंतु वह इसे न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही चौदह दिन से अधिक की अवधि के लिए रोक सकती है। 3. राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की बैठक के गठन के लिए कोरम (गणपूर्ति) कुल सदस्यों की संख्या का दसवाँ हिस्सा या कम से कम दस सदस्य (इनमें से जो भी अधिक हो) निर्धारित किया गया है, और यह नियम विधानसभा तथा विधान परिषद दोनों पर समान रूप से लागू होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा, दलबदल विरोधी कानून और संविधान की विभिन्न अनुसूचियों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा सरकारी प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (जैसे 1, 2, 3...) होगा, किंतु संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 1965 के बाद भी अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सकती है। 2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों द्वारा बढ़ाकर 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' और 'राजस्थानी' दोनों भाषाओं को शामिल किया गया है। 3. संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत दलबदल के आधार पर अयोग्यता के अपवाद के रूप में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) हो जाता है, तो उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य विलय के पक्ष में हैं, तो वे अयोग्यता से सुरक्षित रहेंगे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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