त्वरित लिंक्स
Indian Polity
19 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों की प्रक्रिया तथा विधान परिषद के गठन एवं उत्सादन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे, और ऐसा संकल्प संसद के लिए कानून बनाने हेतु पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है।
- 2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवाद स्वरूप जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के समय इसके विशेष प्रावधान थे)।
- 3. धन विधेयक (Money Bill) केवल राज्य की विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; तथा विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 169 के तहत राज्य विधानसभा द्वारा पारित संकल्प संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होता है; संसद इस पर कानून बनाने के लिए बाध्य नहीं है, वह ऐसा करने से इनकार भी कर सकती है। कथन 2 सही है क्योंकि विधान परिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा का 1/3 और न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित की गई है। कथन 3 सही है क्योंकि धन विधेयक केवल विधानसभा में प्रस्तुत होता है और विधान परिषद इसे अधिकतम 14 दिनों तक ही रोक सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
Related Questions
→
भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों, विशेषाधिकारों और उनके कार्यालयों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी को भारत सरकार का प्रथम विधिक अधिकारी कहा गया है, और उसे अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने या भाग लेने का अधिकार तो है किंतु उसे संसद की किसी भी समिति का सदस्य बनने पर पूर्ण प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है।
2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) न केवल केंद्र और राज्य सरकारों के समेकित फंडों के खातों की लेखापरीक्षा करता है, बल्कि सार्वजनिक निगमों और ऐसी कंपनियों के खातों की भी ऑडिट करता है जिनमें केंद्र या राज्य सरकार की शेयर पूंजी कम से कम 51 प्रतिशत हो।
3. सीएजी की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में यह प्रावधान किया गया है कि वह अपने पद पर रहते हुए केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद (Office of Profit) को ग्रहण नहीं कर सकता है, और सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर पुनः नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के विभिन्न संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों को नागरिकता के अधिकार प्रदान किए गए हैं, किंतु इसके लिए यह आवश्यक है कि ऐसे व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भी भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा हो और उसने भारत के डोमिनियन के उस समय के राजनयिक या कौंसलिया प्रतिनिधि के पास भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया हो।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'पंजीकरण द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Registration) प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को भारत में सामान्यतः निवास करने की न्यूनतम अवधि के रूप में आवेदन करने से ठीक पहले कम से कम सात वर्षों तक लगातार भारत में रहना अनिवार्य होता है, और इसमें किसी भी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है।
3. वर्ष 2003 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम द्वारा भारत में 'प्रवासी भारतीय' (OCI - Overseas Citizen of India) कार्डधारक योजना की शुरुआत की गई थी, और इसके तहत किसी भी OCI कार्डधारक को भारत में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार तथा देश के किसी भी संवैधानिक पद (जैसे राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति) पर निर्वाचन लड़ने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और क्षमादान की शक्तियों (अनुच्छेद 72) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का विस्तार केवल उन्हीं विषयों पर है जिन पर कानून बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है, तथा राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होता है जो संसद के किसी अधिनियम का होता है, बशर्ते इसे संसद की पुनर्बैठक के बाद छह सप्ताह के भीतर दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित न किए जाने पर यह स्वतः समाप्त हो जाए।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'डေकूपर वाद (1970)' में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूर्णतः बाहर है, और राष्ट्रपति इस बात का एकमात्र और अंतिम निर्णायक है कि ऐसी परिस्थितियों का अस्तित्व है जिनके कारण तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है।
3. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और इस न्यायिक/कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग के अंतर्गत राष्ट्रपति को मार्शल लॉ (सैन्य विधि) के तहत दिए गए मृत्युदंड के मामलों में भी क्षमादान देने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, जिस पर न्यायालय द्वारा कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित अनुरोध पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है, न कि प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह पर, और इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने के एक माह के भीतर विशेष बहुमत से अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
2. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन (राजकीय आपातकाल) की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है, तथा यदि न्यायालय यह पाता है कि उद्घोषणा मालाफाइड (Malafide) या असंवैधानिक आधार पर की गई थी, तो न्यायालय भंग की गई विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है और सरकार को बहाल कर सकता है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से भाग XVIII में अनुच्छेद 352A और 355A जोड़कर यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रीय आपातकाल को संपूर्ण देश के किसी एक विशिष्ट भाग तक सीमित रखा जा सकता है, तथा सशस्त्र विद्रोह के आधार पर आंतरिक आपातकाल की घोषणा की जा सकती है, भले ही देश में बाहरी आक्रमण की कोई स्थिति न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना' की शक्ति प्राप्त है, जो कि उन विदेशी भू-भागों पर लागू होती है जो भविष्य में भारत के अधिग्रहण में आ सकते हैं, जबकि अनुच्छेद 3 भारतीय संघ के भीतर पहले से मौजूद राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है।
2. राज्यों के पुनर्गठन के लिए गठित 'राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग, 1953)' ने अपनी रिपोर्ट में भाषाई आधार को राज्यों के गठन का एकमात्र और सर्वोपरि आधार मानते हुए, बहु-राज्यीय भाषा के सिद्धांतों के आधार पर पूरे देश को चौदह राज्यों और छह संघ राज्य क्षेत्रों में पुनर्गठित करने की संस्तुति की थी।
3. संसद द्वारा अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण, उसके क्षेत्र या नाम में परिवर्तन से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता, तथा राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, भले ही उस राज्य विधानमंडल की राय संसद पर बाध्यकारी न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.