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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक पुनरावलोकन, प्रवर्तन तथा अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 31C के अनुसार, यदि राज्य कोई ऐसी विधि बनाता है जो अनुच्छेद 39(b) और (c) में वर्णित नीति निदेशक तत्वों को प्रभावी करने के लिए है, तो उस विधि को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छिनती है या न्यून करती है, बशर्ते उस कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो।
  2. 2. उच्चतम न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है, किंतु यह संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, और अनुच्छेद 31C की वह व्यवस्था जिसके तहत न्यायिक समीक्षा पर प्रतिबंध लगाया गया था, को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था।
  3. 3. अनुच्छेद 34 संसद को यह अधिकार देता है कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी क्षेत्र में सेना विधि (Martial Law) लागू होने के दौरान किसी भी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा लोक व्यवस्था बनाए रखने या उसकी पुनस्थापना के लिए किए गए कृत्यों को वैध बनाने के लिए संसद द्वारा कानून बनाकर क्षतिपूर्ति (Indemnity) का उपबंध कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 31C (जिसे 25वें संविधान संशोधन, 1971 द्वारा जोड़ा गया था) के अनुसार, यदि राज्य नीति के निदेशक तत्वों (Directive Principles) के अनुच्छेद 39(b) और (c) को लागू करने के लिए कोई कानून बनाता है, तो उसे इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है। कथन 2 गलत है: 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 31C के उस पहले भाग को वैध ठहराया था जिसके तहत अनुच्छेद 39(b) और (c) को अनुच्छेद 14 और 19 पर प्राथमिकता दी गई थी, किंतु इसके दूसरे भाग (जो न्यायिक समीक्षा को पूर्णतः प्रतिबंधित करता था) को असंवैधानिक करार दिया था। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 34 संसद को 'मार्शल लॉ' (सेना विधि) लागू होने के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए कार्यों के संबंध में क्षतिपूर्ति (Indemnity) का प्रावधान करने की शक्ति देता है। भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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