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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - Article 36-51) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत राज्य यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि विधिक तंत्र ऐसे अवसरों पर आधारित हो जो सभी नागरिकों को समान न्याय दिला सके और विशेष रूप से आर्थिक या अन्य असमर्थता के कारण कोई भी नागरिक न्याय के अवसरों से वंचित न रहे।
  2. 2. अनुच्छेद 40 के अनुसार राज्य ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान करेगा जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों।
  3. 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले सभी प्रावधान, जिनमें पर्यावरण संरक्षण और समान नागरिक संहिता शामिल हैं, देश के किसी भी न्यायालय द्वारा स्वतः न्यायोचित (Justiciable) होते हैं, और इनके उल्लंघन पर नागरिक सीधे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान किया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 40 पंचायतों के संगठन से संबंधित है जिसे बाद में 73वें संविधान संशोधन द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार DPSP देश के शासन में मौलिक हैं और इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित (Non-justiciable) नहीं कराया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर जाएं।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत 'सहकारी आयोग' (Sarkaria Commission) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना की गई थी, और इसके अध्यक्ष कौन होते हैं? राज्य की कार्यपालिका के संबंध में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम के समान ही होती है, किंतु यह अध्यादेश राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह की अवधि के भीतर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, बशर्ते इस अवधि से पहले विधानमंडल द्वारा इसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित न कर दिया जाए। 2. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए, तथा राज्यपाल के इस अधिकार में मंत्रिपरिषद के निर्णयों के विरुद्ध जाकर सीधे किसी भी प्रशासनिक विभाग से स्पष्टीकरण माँगने की विवेकीय शक्ति भी शामिल है। 3. राज्य विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक जब राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल उस पर अपनी अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है, विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर), अथवा उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकता है, किंतु यदि कोई विधेयक राज्य के उच्च न्यायालय की शक्तियों को इस प्रकार अल्पीकरण करता है कि जिससे उसका संवैधानिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाए, तो राज्यपाल के लिए ऐसे विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रथम वित्त आयोग कब गठित हुआ? अनुच्छेद 110 क्या है? भारतीय संविधान में 'नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles) किस देश के संविधान से प्रेरित हैं?
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