त्वरित लिंक्स
Indian Polity
16 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमण मत द्वारा होता है, जिसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, किंतु राज्य विधानमंडलों के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं।
- 2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प और लोकसभा द्वारा सहमत होना आवश्यक है, तथा इस आशय का कोई भी प्रस्ताव लोकसभा में ही पहले पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं।
- 3. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि जब तक लोकसभा में मंत्रिपरिषद को विश्वास प्राप्त है, तब तक कोई भी व्यक्तिगत मंत्री अपने पद पर बना रह सकता है, भले ही प्रधानमंत्री त्यागपत्र दे दें।
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के निर्वाचक गण द्वारा होता है। इसमें राज्य विधानसभाओं या विधान परिषदों के सदस्य भाग नहीं लेते हैं। कथन 2 असत्य है: उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव (संकल्प) केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, लोकसभा में पहले नहीं। राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प को यदि लोकसभा अपनी सहमति दे देती है, तब उपराष्ट्रपति को हटाया जा सकता है (इसके लिए राज्यसभा में प्रस्ताव लाने से पहले 14 दिन की अग्रिम सूचना देना अनिवार्य है)। कथन 3 असत्य है: अनुच्छेद 75 के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। प्रधानमंत्री के त्यागपत्र देने या उनकी मृत्यु होने पर पूरी मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है, और प्रधानमंत्री के बिना कोई व्यक्तिगत मंत्री अपने पद पर नहीं रह सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसी उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) का लिखित निर्णय उसे संसूचित किया गया हो।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर भी न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, तथा आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की उद्घोषणा को 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया और यह व्यवस्था की गई कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य legislatures, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई है, तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है।
2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अनुसार कोई भी उम्मीदवार अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ सकता है, और यदि वह दोनों सीटों से विजयी होता है, तो उसे छह महीने के भीतर एक निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी सीटों से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है।
3. निर्वाचन आयोग के चुनावों में 'इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन' (EVM) के साथ 'वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल' (VVPAT) प्रणाली को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने के लिए 'लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) अधिनियम, 2013' पारित किया गया था, जिसके माध्यम से मतदाताओं को यह सत्यापित करने का अधिकार मिला कि उनका वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली 'रिट्स' (Writs) की शक्तियों और उनके अनुप्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अवैध नजरबंदी से मुक्त कराना है, और यह रिट केवल किसी सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) के विरुद्ध ही जारी की जा सकती है, निजी व्यक्तियों के विरुद्ध नहीं।
2. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) की रिट किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जारी की जाती है जो किसी लोक पद पर अवैध रूप से आसीन हुआ है, और इस रिट को दायर करने के लिए याचिकाकर्ता का उस पद से सीधे प्रभावित होना या aggrieved होना अनिवार्य नहीं है, इसे कोई भी तीसरा व्यक्ति भी अदालत में ला सकता है।
3. उत्प्रेषण (Certiorari) और प्रतिषेध (Prohibition) दोनों ही रिट्स केवल न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, और इन्हें किसी भी प्रशासनिक प्राधिकारी (Administrative Authority) के खिलाफ जारी नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा के लिए चुनाव कब हुए?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की क्षेत्राधिकारिता और अधीनस्थ न्यायालयों के नियंत्रण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकार के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का दायरा उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम पिछले सात वर्षों से अधिवक्ता या बैरिस्टर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी से संबंधित नियंत्रण शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.