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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग, अनुसूचियाँ और राजभाषा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह उपबंध किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित सभी अधिनियमों व विधेयकों के पाठ अनिवार्य रूप से केवल हिंदी भाषा में ही होंगे, और इसके लिए अंग्रेजी भाषा के प्रयोग की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
- 2. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करना था, तथा इस अनुसूची में शामिल किए जाने वाले कानूनों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पर 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के पश्चात से कोई न्यायिक प्रतिबंध नहीं है, अर्थात् उन्हें किसी भी आधार पर चुनौती दी जा सकती है।
- 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा शामिल किया गया था, जिससे इस अनुसूची में कुल भाषाओं की संख्या बढ़कर 22 हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ, संसद और राज्य विधानमंडलों के सभी विधेयकों व अधिनियमों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होंगे (जब तक कि राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से हिंदी या अन्य राजभाषा का प्रयोग अधिकृत न करे)। कथन 2 असत्य है क्योंकि 'आई.आर. कोहलो बनाम तमिलनाडु राज्य वाद' (2007) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि 24 अप्रैल 1973 (केशवानंद भारती वाद की तिथि) के पश्चात नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) का उल्लंघन करते हैं। कथन 3 पूर्णतः सत्य है; 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ें।
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा में इसे अस्वीकार करने या इसमें संशोधन करने की शक्ति का पूर्ण अभाव होता है, तथा राज्यसभा इस विधेयक को अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के लोकसभा को वापस लौटाने के लिए बाध्य होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 117 के खंड (3) के अंतर्गत ऐसे वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II), जिनमें भारत की संचित निधि से व्यय करने का उपबंध होता है, संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किए जा सकते हैं, किंतु राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना इन्हें संसद द्वारा पारित नहीं किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 108 के प्रावधानों के अनुसार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों (Category-I) के संदर्भ में बुलाई जा सकती है, किंतु धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) के मामले में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत प्रदत्त नागरिकता के प्रावधानों तथा संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो वह स्वतः अनुच्छेद 5, 8 और 10 के उपबंधों के तहत भारत का नागरिक नहीं रह जाएगा, और यह नियम युद्धकाल या शांति Vakal किसी भी परिस्थिति में समान रूप से लागू होता है।
2. अनुच्छेद 11 संसद को यह पूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सकेगी, और संसद द्वारा इसी शक्ति के तहत 'नागरिकता अधिनियम, 1955' पारित किया गया था जिसमें विदेशी नागरिकों के लिए पंजीकरण या देशीकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्ति के विस्तृत नियम बनाए गए हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का निरंतर धारक बना रहेगा, जिसका अर्थ यह है कि संसद नागरिकता के नियम तो बदल सकती है किंतु किसी वैध नागरिक को भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective effect) से सीधे नागरिकताविहीन घोषित करने का अंधाधुंध अधिकार रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों के लिए ब्रिटिश भारत के प्रांतों का चुनाव हुआ था, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसका मुस्लिम लीग द्वारा बहिष्कार किया गया था, और इस बैठक में सभा के अस्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की परंपरा के अनुसार सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के नाते चुना गया था।
3. रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा जनता के प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से किया गया था, क्योंकि वे ब्रिटिश प्रांतों की तरह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व चाहते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा के गठन और इसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों की सीटों का आंटन उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया गया था।
2. रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था, जिसके कारण संविधान सभा एक आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से मनोनीत निकाय थी।
3. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत को और 93 सीटें देशी रियाਸतों को आवंटित की गई थीं, तथा ब्रिटिश भारत की 296 सीटों में से 4 सीटें मुख्य आयुक्तों के प्रांतों (Chief Commissioners' Provinces) से भरी जानी थीं।
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राष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
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