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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोक हित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है, तथा इस परिषद् के निर्णयों को सभी राज्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी माना जाता है।
- 2. अनुच्छेद 258 के तहत राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से, उस सरकार को या उसके अधिकारियों को ऐसे कृत्यों की शक्ति प्रदान कर सकता है जो संघ की कार्यकारी शक्ति के अंतर्गत आते हैं।
- 3. अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 263 के तहत गठित अंतर-राज्यीय परिषद् की प्रकृति मुख्य रूप से परामर्शदात्री (Advisory) है। यह राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच कर सकती है और सामान्य हितों के विषयों पर विचार-विमर्श कर सकती है, किंतु इसके द्वारा दी गई सलाह या निर्णय राज्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी (Binding) नहीं होते हैं। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 258 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह संबंधित राज्य सरकार की सहमति से संघ के कार्यकारी कृत्यों को उस राज्य की सरकार या उसके अधिकारियों को सौंप सकता है। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 249 के अनुसार राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है। अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल देख सकते हैं।
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