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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग, राजभाषा और अनुसूचियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित सभी अधिनियमों व विधेयकों के पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होंगे, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे।
- 2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' भाषा को भी शामिल किया गया है।
- 3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सदस्य की अयोग्यता से संबंधित विवाद पर निर्णय लेने की अंतिम शक्ति संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) में निहित होती है, और इस पर न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार पूर्णतः प्रतिबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा अन्य व्यवस्था न करे, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित सभी विधेयकों व अधिनियमों के आधिकारिक पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होंगे। कथन 2 गलत है: संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में जोड़ा गया और वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ हैं, किंतु इसमें 'अंग्रेजी' (English) भाषा को शामिल नहीं किया गया है। कथन 3 गलत है: दसवीं अनुसूची के तहत पीठासीन अधिकारी द्वारा दल-बदल के आधार पर लिए गए निर्णय की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है; 'किहoto होलोहन बनाम जाचूहो मामले' (1992) में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि पीठासीन अधिकारी का निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है। विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, अधिकारों तथा उनके कृत्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा वह संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोल सकता है और भाग ले सकता है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) भारत सरकार के सभी वित्तीय लेन-देनों की लेखा-परीक्षा (Audit) करता है और अपनी रिपोर्ट सीधे संसद में प्रस्तुत करता है, किंतु संसद के किसी भी सदन की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) की बैठकों में उसका उपस्थित होना और गवाही देना पूरी तरह से प्रतिबंधित होता है।
3. महान्यायवादी का कार्यकाल संविधान द्वारा निश्चित किया गया है और उसे हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की होती है, जबकि CAG का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है और वह अपने पद से हटने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या रोजगार के लिए पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यसभा का पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) कौन होता है?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इस पर कोई संशोधन या अस्वीकृति का प्रस्ताव नहीं ला सकती, किंतु राज्यसभा को यह अधिकार है कि वह धन विधेयक को अधिकतम 30 दिनों की अवधि तक रोक सकती है।
2. अनुच्छेद 107 के अंतर्गत कोई साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में आरंभ किया जा सकता है, और यदि कोई साधारण विधेयक दोनों सदनों के बीच असहमति के कारण संसद के सत्रावसान (Prorogation) के समय लंबित है, तो लोकसभा के विघटन के बावजूद वह विधेयक व्यपगत (Lapse) नहीं होता है।
3. अनुच्छेद 108 के प्रावधानों के तहत किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है, और संयुक्त बैठक में यह विधेयक उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत द्वारा पारित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की विभिन्न अधिकारिताओं, शक्तियों तथा न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की मूल (Original) अधिकारिता संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच किसी कानूनी विवाद में अनन्य रूप से लागू होती है, किंतु इस अधिकारिता के दायरे में किसी निजी नागरिक द्वारा भारत सरकार के खिलाफ लाए गए संविदात्मक (Contractual) विवाद भी शामिल होते हैं, यदि वे संवैधानिक महत्व के हों।
2. अनुच्छेद 141 के अनुसार उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित किया गया विधि (Law declared by Supreme Court) भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, जिसका तात्पर्य है कि न्यायालय के पूर्व निर्णय न्यायिक मिसाल (Precedent) के रूप में कार्य करते हैं और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए उनका पालन करना अनिवार्य होता है।
3. अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि सार्वजनिक महत्व के किसी प्रश्न पर राष्ट्रपति राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह अपनी राय राष्ट्रपति को प्रेषित करे, और ऐसी सलाह राष्ट्रपति पर पूरी तरह से बाध्यकारी (Binding) होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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धन विधेयक (Money Bill) पर अंतिम निर्णय कौन लेता है?
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