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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान है, तथा मूल संविधान से ही निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा है, जिसमें सभी आयुक्तों के पास समान शक्तियाँ और निर्णय लेने के लिए बहुमत का नियम लागू होता है।
  2. 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) में वर्ष 1996 के संशोधन के पश्चात यह अनिवार्य किया गया कि लोकसभा या विधानसभा चुनाव में किसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करते समय कम से कम 10 प्रस्तावकों (Proposers) की आवश्यकता होगी, बशर्ते वह किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का उम्मीदवार न हो।
  3. 3. निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया के संबंध में संविधान यह प्रावधान करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की रीति और आधारों पर ही हटाया जा सकता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि मूल संविधान में निर्वाचन आयोग केवल एक सदस्यीय निकाय था जिसमें केवल मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे। इसे पहली बार 16 अक्टूबर 1989 को बहु-सदस्यीय बनाया गया और तत्पश्चात 1993 से यह निरंतर बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा है। इसके सभी आयुक्तों की शक्तियाँ समान होती हैं और मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि 1996 के संशोधन के अनुसार, यदि उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का है तो केवल एक प्रस्तावक की आवश्यकता होती है, और यदि उम्मीदवार निर्दलीय या गैर-मान्यता प्राप्त दल का है तो उसे उस निर्वाचन क्षेत्र के कम से कम 10 électors (निर्वाचकों) को प्रस्तावक के रूप में प्रस्तुत करना होता है (न कि केवल 10 प्रस्तावकों की शर्त बिना मान्यता प्राप्त के लिए अलग रूप से)। कथन 3 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, किंतु अन्य चुनाव आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की 'सिफारिश (Recommendation)' अनिवार्य होती है, बिना उनकी संस्तुति के राष्ट्रपति उन्हें नहीं हटा सकते। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था से जुड़े ऐसे ही महत्वपूर्ण और विश्लेषणात्मक प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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