त्वरित लिंक्स
Indian Polity
16 views
भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके क्रियान्वयन तथा विशिष्ट संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण को इस प्रकार वितरित करने का निर्देश है कि समुदाय के सामान्य हित की सर्वोत्तम प्राप्ति हो, तथा सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि इन अनुच्छेदों के कार्यान्वयन के लिए बनाई गई विधियों को अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 के उल्लंघन के आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता है, भले ही वे संपत्ति के निजी अधिकारों को प्रभावित करती हों।
- 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में यह नया खंड जोड़ा गया कि राज्य, विशिष्टतया, आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को केवल व्यक्तियों के बीच ही नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए समूहों के बीच भी कम से कम करने का प्रयास करेगा।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 45 में मूल रूप से छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा प्रदान करने का प्रत्यक्ष प्रावधान था, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा बदलकर 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार बना दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 31C के अनुसार, यदि कोई विधि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों को प्रभाव देने के लिए बनाई जाती है, तो उसे इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है। कथन 2 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38(2) को जोड़ा गया, जिसमें आय, प्रतिष्ठा और अवसरों की असमानताओं को कम करने का राज्य का दायित्व निर्धारित किया गया। कथन 3 गलत है: मूल संविधान के अनुच्छेद 45 में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का निर्देश था। 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा इसे अनुच्छेद 21A के तहत मूल अधिकार बनाया गया, तथा अनुच्छेद 45 को संशोधित करके 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा' का नया प्रावधान जोड़ा गया। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के प्रावधानों और उनकी संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग-IX के अनुच्छेद 243घ (Article 243D) के अनुसार पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल सीटों के कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा यह आरक्षण प्रत्यक्ष रूप से चुने जाने वाले अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर भी लागू होता है।
2. 73वें संविधान संशोधन के द्वारा प्रत्येक राज्य में पंचायतों के वित्तीय स्वास्थ्य की समीक्षा के लिए एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) के गठन का प्रावधान अनुच्छेद 243झ (Article 243I) के तहत किया गया है, जिसके सदस्यों की योग्यता और उनके चयन की पद्धति का निर्धारण राज्य के राज्यपाल द्वारा किया जाता है।
3. इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के पश्चात गठित ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों की कार्यक्षमता के लिए कुल 29 विषयों को सूचीबद्ध किया गया है, और इन सभी 29 विषयों पर विधि बनाकर कार्य करने का अधिकार राज्यों के लिए अनिवार्य (Mandatory) कर दिया गया है, जिसे राज्य सरकारें अपनी इच्छा से अस्वीकार नहीं कर सकतीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति लोक महत्व के किसी विषय पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांग सकता है, और ऐसी स्थिति में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है।
2. यदि संविधान-पूर्व की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य समान लिखत से उत्पन्न विवाद को राष्ट्रपति विचार के लिए उच्चतम न्यायालय के पास भेजता है, तो न्यायालय को अपनी राय देना बाध्यकारी (Mandatory) होता है।
3. उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाहकार राय राष्ट्रपति पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होती है, और न ही यह न्यायालय के पारंपरिक निर्णयों की तरह 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) के रूप में एक दृष्टांत (Precedent) बनती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्तियों (Pardoning Powers) और अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court-martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी क्षमादान, प्रविलंबन या परिहार करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का प्रयोग करते समय राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह मानने के लिए बाध्य होना पड़ता है, भले ही न्यायिक समीक्षा के दायरे में यह शक्ति आती हो।
2. राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत जारी किया गया अध्यादेश केवल तभी वैध माना जाता है जब संसद के दोनों सत्रों में से कोई एक सत्र सत्रवसान में हो, और राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग अपने स्वविवेक से कर सकता है, जिसके लिए मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
3. अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (Pardoning Power) में 'क्षमा' (Pardon) से लेकर 'लघुकरण' (Commutation), 'परिहार' (Remission), 'विराम' (Reprieve) और 'प्रविलंबन' (Respite) शामिल हैं, तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार राष्ट्रपति की इन शक्तियों का प्रयोग बिना किसी मनमानेपन के किया जाना चाहिए क्योंकि यह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता, क्षेत्राधिकार तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही अनुच्छेद 32 के तहत रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 219 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय का न्यायाधीश अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्य के राज्यपाल या उसके द्वारा इस कार्य के लिए नियुक्त व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में दिए गए प्रारूप के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञान करता है।
3. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात की जाती है, किंतु किसी राज्य की न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों के अलावा अन्य व्यक्तियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा सीधे राज्य लोक सेवा आयोग के परामर्श से की जाती है, जिसमें उच्च न्यायालय की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह नियम उन मामलों पर लागू नहीं होता जहाँ भारत सरकार द्वारा युद्ध काल की घोषणा की गई हो।
2. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस संवैधानिक शक्ति के तहत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर के भू-भाग पर भी लागू होता है (एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल ऑपरेशन)।
3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उनके लिए देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की आवश्यक निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.