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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II के अंतर्गत नागरिकता के उपबंधों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1957 (मूल अधिनियम) पारित किया था।
- 2. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई प्रवासियों को अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) की परिभाषा से छूट प्रदान करते हुए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए पात्र बनाया गया है, किंतु यह प्रावधान संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों (जैसे असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम) तथा 'इनर लाइन परमिट' (ILP) वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होता है।
- 3. प्राकृतिक रूप से भारत की नागरिकता प्राप्त करने (Naturalisation) के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक को भारत सरकार द्वारा निर्धारित कुल अवधि (जो सामान्यतः आवेदन से ठीक पहले 12 महीने निरंतर और उससे पूर्व के 14 वर्षों में कुल 11 वर्ष है) तक भारत में निवास करना या सेवा देना आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संसद ने नागरिकता के संबंध में कानून बनाने के लिए 'नागरिकता अधिनियम, 1955' (Citizenship Act, 1955) पारित किया था, न कि 1957 में। कथन 2 बिल्कुल सही है; नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों के अवैध प्रवासियों को नागरिकता का मार्ग प्रशスト किया गया है और इसे संविधान की छठी अनुसूची व ILP क्षेत्रों से मुक्त रखा गया है। कथन 3 सही है क्योंकि देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता के लिए 12 महीने निरंतर और पिछले 14 वर्षों में कुल 11 वर्ष भारत में निवास की शर्त को पूरा करना होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, स्रोतों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयरिश संविधान (जिसने स्वयं इन्हें स्पेनिश संविधान से लिया था) से प्रेरित होकर भारतीय संविधान में शामिल किए गए नीति निर्देशक तत्व न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, किंतु संविधान का अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये देश के शासन में मौलिक (Fundamental) हैं और देश के लिए कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए सिद्धांतों को जोड़ा गया, जिनमें समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A), तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) और उसके पश्चात के कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि मूल अधिकार (Fundamental Rights) और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं, और यदि संसद अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को सीमित करते हुए कोई कानून बनाती है, तो उसे केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग IX के अनुच्छेद 243-G के तहत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ऐसी योजनाएं लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों का उल्लेख है।
2. अनुच्छेद 243-I के उपबंधों के अनुसार, प्रत्येक राज्य का राज्यपाल हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा, और इस राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट को राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाया जाता है।
3. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों में महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर कुल सीटों और अध्यक्षों के पदों की कुल संख्या में कम से कम एक-तिहाई (33%) आरक्षण का अनिवार्य प्रावधान किया गया है, किंतु राज्यों को यह संवैधानिक स्वतंत्रता प्राप्त है कि वे कानून बनाकर महिलाओं के लिए इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, उनकी न्यायसंगतता और उनके कानूनी क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्त्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायसंगत (Enforceable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर किसी भी व्यक्ति द्वारा न्यायालय की शरण नहीं ली जा सकती है।
2. यद्यपि अधिकांश नीति निर्देशक तत्व गैर-न्यायसंगत हैं, तथापि संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों, जैसे अनुच्छेद 39(f) के तहत बालकों के स्वास्थ्य और विकास के लिए अवसर सुनिश्चित करना, को प्रभावी बनाने के लिए यदि संसद कोई कानून बनाती है, तो उसे न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है।
3. अनुच्छेद 45 के मूल पाठ में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 से पूर्व 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा' का प्रावधान था, जिसे इस संशोधन के बाद अनुच्छेद 21A के तहत मूल अधिकार बना दिया गया, और वर्तमान अनुच्छेद 45 में केवल चौदह वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंध किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा निरस्त कर दिया गया।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के अनुमोदन से संबंधित प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य कर दिया गया।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा भाग III के किसी भी मूल अधिकार के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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