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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत मूल अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 15 राज्य को यह शक्ति देता है कि वह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष उपबंध कर सके, और 93वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2005 द्वारा इसमें जोड़े गए खंड (5) के माध्यम से निजी शिक्षण संस्थानों (अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर) में भी इनके प्रवेश के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
- 2. अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र में अबाध संचरण का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है, किंतु इस अधिकार पर राज्य द्वारा आम जनता के हित में या किसी अनुसूचित जनजाति के संरक्षण के लिए युक्तियुक्त प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं, जिसके कारण देश के कुछ क्षेत्रों में प्रवेश या निवास पर कानूनी नियंत्रण संभव है।
- 3. अनुच्छेद 25 के अंतर्गत अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु इस अधिकार के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म के प्रचार के अधिकार में दूसरे धर्मांतरण का बलपूर्वक या प्रलोभन के माध्यम से अधिकार शामिल होने की संवैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं है, जैसा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा '斯坦िसलाउस वाद' (Stainislaus case) में स्पष्ट किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 15(4) के तहत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, एससी और एसटी के लिए विशेष प्रावधान की शक्ति है। 93वें संविधान संशोधन 2005 द्वारा अनुच्छेद 15(5) जोड़ा गया, जिसके तहत निजी शिक्षण संस्थानों में भी सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, एससी/एसटी के प्रवेश के लिए विशेष प्रावधान (आरक्षण) करने की शक्ति राज्य को दी गई (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत अबाध संचरण का अधिकार है, लेकिन इस पर आम जनता के हित तथा किसी अनुसूचित जनजाति के हितों के संरक्षण के लिए युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं (जैसे इनर लाइन परमिट प्रणाली या आदिवासी क्षेत्रों की रक्षा)। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 25 के अंतर्गत 'धर्म के प्रचार' (Propagate) के अधिकार में धर्मांतरण करवाने का अधिकार शामिल नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने 'रेव फादर स्टैनिसलाउस बनाम मध्य प्रदेश राज्य' (1977) वाद में स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी को बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने का मौलिक अधिकार नहीं है। अधिक अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण तथा सीमाओं में परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी नए राज्य के निर्माण, उसके क्षेत्रफल में वृद्धि या कमी, या उसके नाम में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्य की सीमाओं या नाम में परिवर्तन करने के लिए यदि राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास वह विधेयक मत व्यक्त करने के लिए भेजा जाता है, तो राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित या अनुमत अवधि के भीतर व्यक्त किया गया मत (विचार) संसद या राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है।
3. अनुच्छेद 4 के प्रावधानों के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश या गठन तथा राज्यों की सीमाओं या नामों में परिवर्तन के लिए बनाई जाने वाली विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, अर्थात इन्हें संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य विधानमंडल के विश्राम काल में प्रयोग की जाती है, किंतु राज्यपाल अपनी इस विधाई शक्ति का प्रयोग बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के अपने स्वविवेक से किसी भी समय कर सकता है, बशर्ते राष्ट्रपति के निर्देश की आवश्यकता न हो।
2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है, और यदि विधानमंडल उस अध्यादेश को अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देता है या उसकी समयावधि (छह सप्ताह) समाप्त हो जाती है, तो वह निष्प्रभावी हो जाता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधान के लिए प्रस्ताव राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई ऐसी सूचना प्रदान करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि ऐसी परिषद् की स्थापना से लोकहित होगा, तो वह संघ और राज्यों के बीच अथवा राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करने और उन पर सलाह देने के लिए इसका गठन कर सकता है।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, और इस परिषद् के स्थायी सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री (जहाँ विधानसभा है), तथा राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के प्रशासक (Administrator) शामिल होते हैं।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) ने अपनी रिपोर्ट में यह संस्तुति की थी कि अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय (Permanent Body) के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, जिसे वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद् आदेश, 1990' के माध्यम से औपचारिक रूप से अस्तित्व में लाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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