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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा की निर्माण प्रक्रिया और उसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग लिया था, और इस बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
- 2. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण के लिए कुल 22 प्रमुख समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी और इसके अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अंबेडकर थे।
- 3. संविधान के निर्माण में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था, तथा संविधान सभा द्वारा इसके वाचन के दौरान कुल तीन वाचन (Readings) हुए थे, जिसके पश्चात 26 नवंबर 1949 को इसे अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया था और इसमें भाग नहीं लिया था। इसके अलावा, डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का 'अस्थाई' (Temporary) अध्यक्ष चुना गया था, न कि स्थायी अध्यक्ष। स्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बाद में 11 दिसंबर 1946 को चुना गया था। कथन 2 सत्य है क्योंकि संविधान सभा ने संविधान के निर्माण से संबंधित कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया था, जिसमें 8 बड़ी समितियाँ और अन्य छोटी समितियाँ शामिल थीं (कुल मिलाकर समितियों की संख्या लगभग 22 थी)। इनमें डॉ. बी. आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में गठित 7 सदस्यीय 'प्रारूप समिति' सबसे महत्वपूर्ण थी। कथन 3 पूरी तरह सत्य है; संविधान के निर्माण में वास्तव में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। इस दौरान संविधान के प्रारूप पर विचार-विमर्श के लिए कुल तीन वाचन हुए और अंततः 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, क्षेत्राधिकार तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट (Writ) अधिकारिता, उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत और व्यापक है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी 'अन्य प्रयोजन' (जैसे सामान्य कानूनी अधिकारों के हनन पर) के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्यपाल द्वारा की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए यह अनिवार्य है कि व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो तथा संघ या राज्य की सेवा में कोई अन्य सरकारी अधिकारी न हो।
3. जिला न्यायालयों से भिन्न अन्य अधीनस्थ न्यायालयों (जैसे मुंसिफ न्यायालय आदि) की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके नियमों के तहत की जाती है, तथा राज्यों के न्यायिक सेवा पर नियंत्रण (जिसमें पोस्टिंग और पदोन्नति शामिल है) संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत पूर्ण रूप से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान कहाँ से लिया गया?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India - CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में audiencia (सुनवाई) का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी परिस्थिति में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था पर आधारित है, किंतु भारतीय CAG और ब्रिटिश CAG में मूलभूत अंतर यह है कि ब्रिटेन में CAG के प्राधिकरण के बिना लोकनिधि (Public Exchequer) से एक भी रुपया बाहर नहीं निकाला जा सकता (अर्थात वह संवितरण पर नियंत्रण रखता है), जबकि भारत में CAG का मुख्य कार्य लेखापरीक्षण (Audit) करना है, संवितरण पर पूर्व नियंत्रण रखना नहीं।
3. अनुच्छेद 148 के अनुसार CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं ग्राउंड्स पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु CAG अपना पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद पर दोबारा नियुक्त होने के लिए पात्र (Eligible) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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लोकसभा में अधिकतम सीटें?
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भारत का संविधान 'अर्ध-संघीय' (Quasi-Federal) है, यह किसने कहा था?
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