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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निहित समाजवादी सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए बनाए गए कानूनों को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, बशर्ते कि ऐसा कानून नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाया गया हो (यह संरक्षण मूल रूप से 25वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था)।
  2. 2. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश की विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, तथापि इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं ठहराया गया है, जिसका अर्थ है कि इनके हनन पर सीधे उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है।
  3. 3. स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिश पर ही भारतीय संविधान में भाग IV-A के अंतर्गत मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया था, और इस समिति ने ही यह संस्तुति की थी कि नीति निर्देशक तत्वों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता प्रदान की जानी चाहिए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के 25वें संशोधन अधिनियम, 1972 द्वारा अनुच्छेद 31C जोड़ा गया था, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39(b) और (c) के सामाजिक-आर्थिक न्याय से संबंधित नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने वाले विधियों को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वे अनुच्छेद 14 या 19 का उल्लंघन करते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि नीति निर्देशक तत्व न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, यानी इनके हनन पर न्यायालय द्वारा इन्हें लागू नहीं कराया जा सकता और इनके उल्लंघन पर अनुच्छेद 32 के तहत सीधे उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर नहीं की जा सकती। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है; स्वर्ण सिंह समिति ने मूल कर्तव्यों की संस्तुति की थी, लेकिन नीति निर्देशक तत्वों को मूल अधिकारों पर प्राथमिकता देने का मुख्य प्रावधान केशवानंद भारती मामले के बाद 42वें संशोधन द्वारा लाया गया था, न कि समिति की प्रत्येक संस्तुति से यह सीधे जुड़ा था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार, नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये प्रावधान किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता। 2. अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित समाजवादी सिद्धांतों के कार्यान्वयन के संबंध में 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 31C जोड़ा गया, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि यदि कोई विधि अनुच्छेद 39(b) या (c) में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाई जाती है, तो उसे इस आधार पर शून्य नहीं ठहराया जाएगा कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन करती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में अनुच्छेद 31C के उस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था, जिसके अंतर्गत नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने वाली विधियों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे? भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा के गठन का आधार कैबिनेट मिशन योजना, 1946 था, जिसके तहत संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को 293 सीटें और देशी रियासतों को 93 सीटें आवंटित की गई थीं। 2. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से हुआ था, और इसमें देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था, जिसके कारण संविधान सभा एक आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से मनोनीत निकाय थी। 3. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसका मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया था, और इस अवसर पर सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की परंपरा के अनुसार सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Interim President) चुना गया था, जबकि बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्यों के उच्च न्यायालयों की अधिकारिता, उनके न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण तथा अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का दायरा उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता से अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, और राज्यपाल द्वारा जिला न्यायाधीश से भिन्न व्यक्तियों की न्यायिक सेवा के पदों पर नियुक्ति राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात ही की जाती है। 3. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 3 के अंतर्गत 'प्रशासन की स्थापना, उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों का गठन और संगठन' पूर्ण रूप से राज्य सरकारों के विधाई क्षेत्राधिकार के अधीन आता है, और इसमें संसद को किसी भी प्रकार की कानून बनाने की शक्ति प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - Article 36-51) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 44 में 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुनिश्चित करना है, और यह प्रावधान देश के किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा स्वतः प्रवर्तनीय (Self-enforceable) है। 2. अनुच्छेद 48A के अनुसार राज्य देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा, जिसे वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में जोड़ा गया था। 3. अनुच्छेद 50 के अंतर्गत राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने के लिए राज्य कदम उठाएगा, ताकि शासन के अंगों में शक्तियों का स्पष्ट विभाजन बना रहे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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