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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, किंतु राज्य विधानमंडलों के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं।
  2. 2. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री के लिए यह आवश्यक नहीं है कि नियुक्ति के समय वह संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो, बशर्ते वह छह मास के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बन जाए।
  3. 3. अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और देश के प्रशासन तथा विधान संबंधी प्रस्तावों की जानकारी राष्ट्रपति को दे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे प्रदान करे; किंतु यदि मंत्रिपरिषद का कोई मंत्री व्यक्तिगत रूप से कोई निर्णय लेता है और प्रधानमंत्री उसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखने से इंकार कर दे, तो राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन अनुच्छेद 66 के तहत संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) से बने निर्वाचक मंडल द्वारा होता है। इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते हैं (जो कि राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 75(1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। कोई व्यक्ति जो संसद का सदस्य नहीं है, वह भी प्रधानमंत्री या मंत्री बन सकता है, बशर्ते उसे 6 महीने के भीतर संसद के किसी एक सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी (जैसे पी. वी. नरसिम्हा राव, एच. डी. देवेगौड़ा और मनमोहन सिंह के मामलों में देखा गया था)। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह प्रशासन और कानून निर्माण से जुड़े प्रस्तावों की जानकारी राष्ट्रपति को दे। हालाँकि, यदि कोई मंत्री मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के बिना कोई निर्णय लेता है या प्रधानमंत्री के निर्णयों की अवहेलना करता है, तो प्रधानमंत्री उस मंत्री को बर्खास्त करने की सलाह राष्ट्रपति को दे सकता है, किंतु इस आधार पर राष्ट्रपति सीधे पूरी मंत्रिपरिषद को बर्खास्त नहीं कर सकता जब तक कि प्रधानमंत्री स्वयं त्यागपत्र न दे दे या लोकसभा में बहुमत न खो दे। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों को पढ़ें।
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