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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अधीन राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तृत (Co-extensive) है, जिसका तात्पर्य यह है कि राष्ट्रपति उन सभी विषयों पर अध्यादेश जारी कर सकता है जिन पर संसद कानून बना सकती है, और इसके द्वारा संविधान के किसी भी प्रावधान (मौलिक अधिकारों सहित) में संशोधन किया जा सकता है।
- 2. मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत (अनुच्छेद 75(3)) के अनुसार, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद संसद के निचले सदन यानी लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि यदि लोकसभा में किसी एक कैबिनेट मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
- 3. अनुच्छेद 78 के प्रावधानों के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि यद्यपि राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तृत है, किंतु इसके माध्यम से संविधान के मूल ढांचे में परिवर्तन नहीं किया जा सकता और न ही मौलिक अधिकारों सहित संविधान के हर भाग में संशोधन किया जा सकता है (अध्यादेश के माध्यम से संविधान संशोधन नहीं किया जा सकता)। कथन 2 सही है, मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है और 'एक साथ तैरते और एक साथ डूबते' हैं। कथन 3 भी बिल्कुल सही है, जो अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री के कर्तव्यों को स्पष्ट करता है। भारतीय संविधान और कार्यपालिका की शक्तियों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India - CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में audiencia (सुनवाई) का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी परिस्थिति में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था पर आधारित है, किंतु भारतीय CAG और ब्रिटिश CAG में मूलभूत अंतर यह है कि ब्रिटेन में CAG के प्राधिकरण के बिना लोकनिधि (Public Exchequer) से एक भी रुपया बाहर नहीं निकाला जा सकता (अर्थात वह संवितरण पर नियंत्रण रखता है), जबकि भारत में CAG का मुख्य कार्य लेखापरीक्षण (Audit) करना है, संवितरण पर पूर्व नियंत्रण रखना नहीं।
3. अनुच्छेद 148 के अनुसार CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं ग्राउंड्स पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु CAG अपना पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद पर दोबारा नियुक्त होने के लिए पात्र (Eligible) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का कार्यकाल कितना होता है?
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पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है?
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संसद का 'निम्न सदन' (Lower House) किसे कहा जाता है?
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आरबीआई राष्ट्रीयकरण?
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