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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदनों—विधानसभा (Legislative Assembly) और विधान परिषद (Legislative Council)—की संरचना, निर्वाचन और उनकी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन से पूर्व कुछ राज्यों में स्थिति भिन्न थी)।
  2. 2. विधान परिषद के कुल सदस्यों का 1/3 भाग राज्य के स्थानीय प्राधिकारियों (जैसे नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों आदि) के एक निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है, 1/12 भाग ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य में कम से कम तीन वर्ष से निवास कर रहे हों, और 1/12 भाग ऐसे अध्यापकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य में माध्यमिक विद्यालयों से कम शिक्षण संस्थानों में तीन वर्ष से अध्यापन कर रहे हों।
  3. 3. धन विधेयक (Money Bill) के मामले में राज्य विधान परिषद की शक्तियां अत्यंत सीमित होती हैं; विधान परिषद किसी धन विधेयक को न तो अस्वीकृत कर सकती है और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, तथा उसे विधेयक प्राप्ति के 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ विधानसभा को लौटाना होता है, और यदि वह ऐसा नहीं करती है तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 171(1) के अनुसार विधान परिषद की सदस्य संख्या विधानसभा की 1/3 होती है और न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित है। कथन 2 गलत है क्योंकि अध्यापकों के निर्वाचन के लिए प्रावधान यह है कि वे राज्य के भीतर कम से कम तीन वर्ष से माध्यमिक विद्यालयों (High Schools) या उससे उच्च संस्थानों में शिक्षण कार्य कर रहे हों, न कि 'माध्यमिक विद्यालयों से कम'। कथन 3 सही है क्योंकि धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और विधान परिषद को इसमें संशोधन या अस्वीकार करने की शक्ति नहीं होती; उसे केवल 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें देनी होती हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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