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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction) और संविधान की व्याख्या से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 132 के अनुसार, भारत के किसी भी उच्च न्यायालय के सिविल, दाण्डिक या अन्य कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील तब की जा सकती है, जब संबंधित उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामले में संविधान के निर्वचन (Interpretation of Constitution) से संबंधित कोई सारवान प्रश्न अंतर्निहित है।
- 2. अनुच्छेद 133 के अंतर्गत दीवानी (Civil) मामलों में उच्चतम न्यायालय में अपील करने के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उच्च न्यायालय यह प्रमाणित करे कि उस वाद में व्यापक महत्व का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है और उच्चतम न्यायालय द्वारा उस पर निर्णय दिया जाना आवश्यक है (यह प्रावधान 30वीं संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा मौद्रिक मूल्य सीमा को समाप्त करने के बाद जोड़ा गया)।
- 3. अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति विधि या तथ्य के किसी ऐसे प्रश्न पर जो सार्वजनिक महत्व का है, उच्चतम न्यायालय की राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 132 के तहत उच्च न्यायालय के किसी भी निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है, बशर्ते उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामले में संविधान के निर्वचन से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण विधि का प्रश्न शामिल है। कथन 2 सही है: 30वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा दीवानी मामलों में अपील के लिए निर्धारित मौद्रिक सीमा (Monetary limit) को समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर उच्च न्यायालय के प्रमाण-पत्र को अनिवार्य बना दिया गया कि मामला उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णय किए जाने योग्य व्यापक महत्व का है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा विधि या तथ्य के सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर परामर्श मांगने पर उच्चतम न्यायालय के लिए राय देना **अनिवार्य नहीं** है (विशेषकर प्रथम श्रेणी के मामलों में न्यायालय अपनी विवेक शक्ति का उपयोग कर सकता है, जबकि संविधान पूर्व संधियों या करारों से उत्पन्न मामलों में राय देना अनिवार्य होता है)। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना' कर सके, जिसका संबंध मुख्य रूप से उन भू-भागों से है जो भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं, जबकि अनुच्छेद 3 'भारतीय संघ के भीतर मौजूद राज्यों' के पुनर्गठन से संबंधित है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने या उसके नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Recommendation) के बिना ही पुनः स्थापित किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 4 के अनुसार, अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत बनाए गए नए राज्यों के प्रवेश या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए विशेष बहुमत का होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, हटाने की प्रक्रिया तथा प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, किंतु राज्य विधानसभाओं के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं।
2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा द्वारा अपने तत्समय समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित ऐसे संकल्प से हटाया जा सकता है जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस आशय का कोई भी प्रस्ताव तब तक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता जब तक कि उस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने से कम से कम 14 दिन पूर्व लिखित सूचना न दी गई हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, और किसी भी मंत्री को पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के सामूहिक त्यागपत्र की प्रतीक्षा किए बिना केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर व्यक्तिगत रूप से बर्खास्त कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर क्या जोड़ा गया?
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संसद की कुल कितनी बैठकें एक वर्ष में अनिवार्य हैं?
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राज्य विधानमंडल के उच्च सदन यानी विधान परिषद (Legislative Council) के गठन, उत्सादन और उसकी संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार, संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने इस आशय का एक संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया हो।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए, सिवाय इसके कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के ऐतिहासिक अपवाद के तहत कुछ छोटे राज्यों में यह संख्या बीस तक निर्धारित की गई थी।
3. विधान परिषद के कुल सदस्यों का एक-तिहाई हिस्सा स्थानीय संस्थाओं जैसे नगरपालिकाओं और जिला बोर्डों के निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है, तथा एक-तिहाई हिस्सा राज्य की विधानसभा के ऐसे सदस्यों द्वारा चुना जाता है जो विधानसभा के सदस्यों में से नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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