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Indian Polity
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों और राजभाषा से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 भाषाएँ कर दिया गया है, किंतु इस अनुसूची में अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा को अभी तक शामिल नहीं किया गया है।
  2. 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का विस्तार से उपबंध किया गया है, जिसके तहत संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी और अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप निर्धारित किया गया है, साथ ही संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा 1965 के पश्चात भी सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सकती है।
  3. 3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्योग्यता से संबंधित प्रावधान करती है, और इसके तहत किसी राजनीतिक दल के विलय (Merger) के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य दल-विभाजन या विलय के पक्ष में सहमत हों।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान की आठवीं अनुसूची में अंग्रेजी भाषा को शामिल नहीं किया गया है, किंतु 'राजस्थानी' भाषा को भी अभी तक इस अनुसूची में आधिकारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है, हालांकि मांग लगातार जारी है। इसके अलावा, आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं और वर्तमान में 22 भाषाएँ हैं। कथन 2 सत्य है; संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343-351) में संघ की राजभाषा का उल्लेख है और अनुच्छेद 343(3) के तहत संसद को यह शक्ति दी गई है कि वह राजभाषा अधिनियम, 1963 के माध्यम से अंग्रेजी के प्रयोग को आगे भी जारी रख सकती है। कथन 3 सत्य है; 52वें संविधान संशोधन 1985 द्वारा जोड़ी गई दसवीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून से संबंधित है, जिसमें 91वें संशोधन (2003) के पश्चात यह प्रावधान किया गया कि विलय तभी वैध माना जाएगा जब किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य उसके पक्ष में हों। भारतीय संविधान के ऐसे ही महत्वपूर्ण और विस्तृत विषयों को पढ़ने के लिए विजिट करें: भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था
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