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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के संवैधानिक संबंधों तथा उनकी शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, तथा मंत्रिपरिषद के सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका अर्थ है कि राज्यपाल व्यक्तिगत रूप से किसी भी मंत्री को मुख्यमंत्री की सलाह के बिना भी बर्खास्त कर सकता है।
  2. 2. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
  3. 3. राज्य विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक जब राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल उस पर अपनी अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है, विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर), अथवा उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकता है, और राज्यपाल के लिए यह अनिवार्य है कि वह कुछ विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखे जाने वाले विधेयकों पर मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि यद्यपि मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, किंतु व्यावहारिक और संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल किसी मंत्री को केवल मुख्यमंत्री की सलाह पर ही बर्खास्त कर सकता है, अपनी स्वतंत्र इच्छा से नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के संवैधानिक कर्तव्यों को परिभाषित करता है जिसके तहत उसे राज्य के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों की जानकारी राज्यपाल को देनी होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 200 के तहत राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक को आरक्षित रखने के मामले में राज्यपाल अपने स्वविवेक (Discretion) का प्रयोग कर सकता है, और इसके लिए वह मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था का अध्ययन करें।
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