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Indian Polity
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मूल संविधान में यह प्रावधान था कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय होगा, जिसे बाद में 1989 में एकल-सदस्यीय बनाया गया।
  2. 2. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता।
  3. 3. चुनाव सुधारों से जुड़ी 'दिनेश गोस्वामी समिति' (1990) ने राज्य द्वारा चुनाव खर्च के वित्तपोषण (State Funding of Elections), इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग और बूथ कैप्चरिंग के विरुद्ध कड़े दंडनीय प्रावधानों की सिफारिश की थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि मूल संविधान में निर्वाचन आयोग केवल एक एकल-सदस्यीय निकाय (Chief Election Commissioner) था। इसे पहली बार 16 अक्टूबर 1989 को बहु-सदस्यीय बनाया गया था। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के अनुसार ही हटाया जा सकता है, तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। कथन 3 सत्य है; दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी रिपोर्ट में राज्य द्वारा चुनाव वित्तपोषण, ईवीएम के उपयोग तथा बूथ कैप्चरिंग को संज्ञेय अपराध बनाने की प्रमुख सिफारिशें की थीं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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