त्वरित लिंक्स
Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 12-35) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए अधिनियमों, अध्यादेशों, आदेशों, उप-विधियों, नियमों तथा रूढ़ि या प्रथाओं (जिन्हें विधि का बल प्राप्त है) को शामिल किया गया है, किंतु इसके दायरे में कोई भी ऐसा संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) शामिल नहीं है जिसे अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया के तहत पारित किया गया हो।
- 2. अनुच्छेद 15(5) के प्रावधान के अनुसार राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए शैक्षणिक संस्थानों (निजी संस्थानों सहित, चाहे वे सहायता प्राप्त हों या अशासकीय) में प्रवेश के लिए विशेष उपबंध करने की शक्ति प्राप्त है, सिवाय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के।
- 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण के अधिकार में 'त्वरित सुनवाई का अधिकार' (Right to Speedy Trial) और 'निशुल्क विधिक सहायता का अधिकार' (Right to Free Legal Aid) दोनों को उच्चतम न्यायालय द्वारा विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों में मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि केशवानंद भारती वाद (1973) और बाद के निर्णयों में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 13(4) के अनुसार संविधान संशोधन अधिनियम भी एक 'विधि' हो सकता है, और यदि कोई संवैधानिक संशोधन भाग-III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है या 'मूलभूत ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट करता है, तो न्यायपालिका द्वारा उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 15(5) (जिसे 93वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2005 द्वारा जोड़ा गया था) राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, SC और ST के लिए शिक्षण संस्थानों में प्रवेश हेतु विशेष प्रावधान करने की शक्ति देता है, बशर्ते वे अनुच्छेद 30(1) के तहत आने वाले अल्पसंख्यक संस्थान न हों। कथन 3 सत्य है; हुसैनारा खातून वाद और मस्कहटा केस जैसे मामलों में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के दायरे का विस्तार करते हुए 'त्वरित सुनवाई' और 'निःशुल्क विधिक सहायता' को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग माना है। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त महान्यायवादी को देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई (Audience) का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद के किसी भी सदन में या उसकी संयुक्त बैठक में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) न केवल केंद्र और राज्य सरकारों के लेखों की संपरीक्षा (Audit) करता है, बल्कि उसे भारत की संचित निधि से धन निकालने पर पूर्व-नियंत्रण (Pre-audit) का भी पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद या नियोजन का पात्र नहीं होता है, जबकि महान्यायवादी के लिए ऐसा कोई विधिक प्रतिबंध नहीं है कि वह अपनी निजी प्रैक्टिस या वकालत नहीं कर सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पर आधारित है, और इसे संविधान के लागू होने के पश्चात केवल एक बार (42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा) संशोधित किया गया है जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
2. 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है, तथा संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन करते हुए इसके किसी भी मूल भाग को हटा सकती है।
3. 'केशवानंद भारती वाद (1973)' और 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद (1995)' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न अंग है, और यद्यपि यह देश की विधायिका को कोई नई शक्ति प्रदान नहीं करती और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथापि यह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के गठन के समय रियासतों (Princely States) को उनकी जनसंख्या के आधार पर सीटें आवंटित की गई थीं और रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाना था, न कि रियासतों के शासकों द्वारा।
2. संविधान सभा की संचालन समिति (Steering Committee) और नियम समिति (Rules of Procedure Committee) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि सदन समिति (House Committee) के अध्यक्ष बी. पट्टाभि सीतारमैया थे।
3. प्रारूप समिति (Drafting Committee), जिसे 29 अगस्त 1947 को नियुक्त किया गया था, में अध्यक्ष सहित कुल सात सदस्य शामिल थे, और इस समिति ने संविधान के प्रारूप का पहला संस्करण फरवरी 1948 में प्रकाशित किया था जिस पर देशवासियों को आलोचना और सुझाव देने के लिए आठ महीने का समय दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act of 1773) और पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act of 1784) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पद नाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इस एक्ट के तहत ही कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई थी जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई।
3. रेगुलेटिंग एक्ट के अंतर्गत बंगाल के गवर्नर-जनरल को बंबई और मद्रास की प्रेसिडेंसी को भी अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार मिल गया था, जिससे भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव पड़ी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के पहले राष्ट्रपति?
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