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Indian Polity
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (चार्टर अधिनियमों और परिषद् अधिनियमों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चार्टर अधिनियम, 1853 के माध्यम से पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को पृथक किया गया, और इसके तहत एक अलग 'भारतीय केंद्रीय विधान परिषद' (Indian Legislative Council) की स्थापना की गई जिसे 'लहिया विधान परिषद' भी कहा गया, जिसमें छह नए पार्षदों में से स्थानीय प्रतिनिधित्व के तहत मद्रास, बंबई, बंगाल और आगरा की प्रांतीय सरकारों से चार सदस्यों का चुनाव किया गया था।
  2. 2. भारत परिषद अधिनियम, 1861 द्वारा गवर्नर-जनरल की कार्यकारी परिषद में विधायी कार्यों के विस्तार के लिए सदस्यों की संख्या कम से कम 6 और अधिकतम 12 तय की गई, और इसी अधिनियम के तहत लॉर्ड कैनिंग द्वारा शुरू की गई 'पोर्टफोलियो प्रणाली' (Portfolio System) को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई।
  3. 3. भारत परिषद अधिनियम, 1892 के द्वारा केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में अतिरिक्त (गैर-सरकारी) सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई तथा पहली बार विधान परिषदों के सदस्यों को बजट पर बहस करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया, किंतु इसके अंतर्गत पूरक प्रश्न पूछने (Supplementary Questions) और मतदान करने का अधिकार अभी भी प्रदान नहीं किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि चार्टर अधिनियम, 1853 के तहत जो छह नए स्थानीय प्रतिनिधि जोड़े गए थे, उनमें मद्रास, बंबई, बंगाल और उत्तर-पश्चिम प्रांत (आगरा नहीं) की प्रांतीय सरकारों से चार सदस्यों को शामिल किया गया था, और यह विधान परिषद आगे चलकर 'लघु संसद' की तरह कार्य करने लगी थी। कथन 2 सत्य है; 1861 के अधिनियम ने भारत में संवैधानिक और राजनीतिक विकास की नींव रखी, पोर्टफोलियो प्रणाली को वैधानिक मान्यता दी और गवर्नर-जनरल को पहली बार आपातकाल में अध्यादेश जारी करने की शक्ति (बिना परिषद की सहमति के 6 माह के लिए) प्रदान की। कथन 3 सत्य है; 1892 के अधिनियम ने विधान परिषदों के कार्यों में वृद्धि की, उन्हें बजट पर चर्चा करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने की अनुमति दी, लेकिन उस समय पूरक प्रश्न पूछने तथा मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं था। इस विषय की विस्तृत और गहरी समझ के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन कर सकते हैं।
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अंतर्गत किसी विधेयक को 'धन विधेयक' (Money Bill) के रूप में प्रमाणित करने की अनन्य शक्ति लोकसभा अध्यक्ष के पास होती है, और लोकसभा अध्यक्ष का यह प्रमाणन अंतिम होता है तथा इसे किसी भी न्यायालय या सदन में चुनौती नहीं दी जा सकती है। 2. वित्तीय विधेयक (श्रेणी-I), जिसका उल्लेख अनुच्छेद 117(1) में किया गया है, को लोकसभा में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और इस प्रकार के वित्तीय विधेयक को पारित करने के संबंध में लोकसभा और राज्यसभा की शक्तियां साधारण विधेयक की तरह पूर्णतः समान होती हैं। 3. अनुच्छेद 117(3) के अंतर्गत आने वाले वित्तीय विधेयक (श्रेणी-II), जिनमें ऐसे उपबंध होते हैं जिनसे भारत की संचित निधि से व्यय करना पड़े, को संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना भी पुनः स्थापित किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना ऐसा कोई भी विधेयक किसी भी सदन द्वारा पारित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान का हिस्सा नहीं बनाया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-क के अनुच्छेद 51-क में जोड़ा गया था। 2. मूल कर्तव्यों का विचार तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वें मूल कर्तव्य को 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से जोड़ा गया था। 3. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं; तथा प्रकृति से ये सभी कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के तहत न्यायालय द्वारा दंडित किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदत्त है कि यदि वह लोक हित में आवश्यक समझे, तो राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच करने, उनके सामान्य हितों पर चर्चा करने या उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है। 2. वर्ष 1990 में सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा गठित स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद् के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, संघ राज्य क्षेत्रों (केंद्र शासित प्रदेशों) के मुख्यमंत्री तथा जिन संघ राज्य क्षेत्रों में विधानसभा नहीं है उनके प्रशासक शामिल होते हैं। 3. अनुच्छेद 263 के अधीन गठित अंतर-राज्यीय परिषद् मुख्य रूप से एक परामर्शदात्री और विचार-मंच (Deliberative Body) के रूप में कार्य करती है, और इसके द्वारा दिए जाने वाले निर्णय या संस्तुतियाँ प्रकृति से सभी संबंधित राज्यों तथा केंद्र सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते हैं। 2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव कुल सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) द्वारा पारित किया जाना चाहिए और लोकसभा की केवल सहमति (Simple Majority) आवश्यक होती है, बशर्ते इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने से कम से कम 14 दिन पूर्व उपराष्ट्रपति को लिखित सूचना दी गई हो। 3. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान में 'नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles) किस देश के संविधान से प्रेरित हैं?
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