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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित विधियों के विरुद्ध अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) के मामले में क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त नहीं है और न ही वह सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड को माफ कर सकता है।
  2. 2. अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम के समान ही होती है, किंतु यदि ऐसा अध्यादेश किसी ऐसे विषय पर है जिसके लिए संविधान के तहत राज्य विधानमंडल द्वारा विधेयक पर राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती, तो राज्यपाल ऐसा अध्यादेश राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखे बिना अपनी मर्जी से प्रख्यापित नहीं कर सकता।
  3. 3. अनुच्छेद 164 के प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या राज्य विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और छोटे राज्यों के लिए मंत्रिपरिषद की न्यूनतम संख्या मुख्यमंत्री सहित 12 निर्धारित की गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति राज्य की विधियों के मामलों तक सीमित है। राज्यपाल मृत्युदंड को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता (यह शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 72 के तहत है), किंतु राज्यपाल मृत्युदंड के मामले में भी कानूनन प्रविलंबन, विराम, परिहार या लघुकरण (Commutation) कर सकता है, क्योंकि राज्यपाल के पास मृत्युदंड के निलंबन या लघुकरण की शक्ति पर कोई पूर्ण संवैधानिक प्रतिबंध नहीं है (हालांकि पूर्ण क्षमा और कोर्ट मार्शल के मामलों में उसे शक्ति प्राप्त नहीं है)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे यदि कोई विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखा जाना आवश्यक हो, तो वह अध्यादेश प्रख्यापित करने से पूर्व राष्ट्रपति से निर्देश प्राप्त करेगा। कथन 3 सही है: 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा अनुच्छेद 164(1क) जोड़ा गया, जिसके तहत मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की कुल संख्या राज्य विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% से अधिक नहीं होगी और न्यूनतम संख्या 12 निर्धारित की गई। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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