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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा, किंतु दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि उनमें से उन राज्यों के समूहों के लिए एक 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JSPSC) होगा, और ऐसा आयोग संसद की विधि द्वारा नहीं बल्कि राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश द्वारा सृजित किया जाता है।
- 2. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु SPSC के किसी सदस्य को उसके पद से हटाने का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति को प्राप्त है, संबंधित राज्य के राज्यपाल को नहीं।
- 3. अनुच्छेद 320 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की सेवाओं के लिए नियुक्तियों की परीक्षाओं का संचालन करता है, तथा आयोग द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति या राज्यपाल के लिए सदैव और हर परिस्थिति में पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 315(2) के अनुसार दो या अधिक राज्य मिलकर संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) के गठन का अनुरोध कर सकते हैं, और इसका सृजन संसद द्वारा 'विधि' (Law) बनाकर किया जाता है, न कि राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश द्वारा। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 316 के तहत SPSC के सदस्यों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु अनुच्छेद 317 के प्रावधानों के अनुसार उन्हें पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास निहित होती है, राज्यपाल के पास नहीं। कथन 3 असत्य है क्योंकि UPSC या SPSC द्वारा दी गई सलाह प्रकृति में आम तौर पर 'सलाहकारी' (Advisory) होती है और सरकार (राष्ट्रपति या राज्यपाल) के लिए बाध्यकारी नहीं होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, जो राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और वह इस रूप में अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा, किंतु जब वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्यसभा के सभापति के रूप में किसी भी वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होगा, बल्कि उसे राष्ट्रपति के वेतन और परिलब्धियों प्राप्त करने का अधिकार होगा।
2. अनुच्छेद 74(1) के तहत राष्ट्रपति को उसके कृत्यों के प्रयोग में सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग इस सलाह के अनुसार करने के लिए पूरी तरह बाध्य है, तथा मंत्रिपरिषद द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सलाह की किसी भी न्यायालय में जाँच की जा सकती है।
3. अनुच्छेद 75(2) के उपबंधों के अनुसार प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से कभी भी और किसी भी कारण से बर्खास्त कर सकता है, भले ही लोकसभा में प्रधानमंत्री के पास स्पष्ट बहुमत क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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मौलिक कर्तव्यों को किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
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राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के तहत क्षमादान देते हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की प्रशासनिक नियंत्रण शक्ति, रिट अधिकारिता तथा अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्राधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और यह अधीक्षण शक्ति केवल प्रशासनिक मामलों तक सीमित है तथा इसके अंतर्गत न्यायिक समीक्षा या अपीलिया पुनरीक्षण का अधिकार शामिल नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिला न्यायालयों और उनसे भिन्न अन्य न्यायालयों) की पोस्टिंग, प्रमोशन और उनके नियंत्रण से संबंधित संपूर्ण प्रशासनिक अधिकार संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होते हैं।
3. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता के संदर्भ में, उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी 'अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है, जिससे उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का दायरा उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता से अधिक व्यापक हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अनुच्छेद 315 से 323 तक संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग की संरचना, सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल, स्वतंत्रता तथा उनके कार्यों और शक्तियों से संबंधित प्रावधानों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
2. संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उनके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
3. संविधान में आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों को निर्धारित करने के लिए कोई निश्चित मानदंड या अहर्ताएं तय नहीं की गई हैं, और यह पूरी तरह से राष्ट्रपति (संघ आयोग के लिए) या राज्यपाल (राज्य आयोग के लिए) के विवेक पर छोड़ा गया है कि वे आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा शर्तों का निर्धारण करें, बशर्ते इस शर्त के तहत कि आयोग के आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद पर रहे हों।
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