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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-II (अनुच्छेद 5 से 11) के अंतर्गत नागरिकता के संवैधानिक उपबंधों और संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों के तहत भारत का नागरिक है या समझा जाता है, वह संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा, जिसका अर्थ यह है कि संसद साधारण कानून के माध्यम से भी किसी व्यक्ति की नागरिकता को बिना किसी विधायी प्रक्रिया के सीधे समाप्त कर सकती है।
- 2. अनुच्छेद 7 के प्रावधान के तहत जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान के लिए प्र्रव्रजन (Migrate) कर गया था, वह भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा, किंतु यदि वह व्यक्ति भारत में पुनर्वास (Resettlement) के लिए अनुज्ञापत्र (Permit) के आधार पर वापस लौट आता है, तो उसे अनुच्छेद 6 के तहत पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार मिल जाता है।
- 3. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस शक्ति के अंतर्गत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर के भू-भाग पर भी प्रभावी है (Extra-territorial operation)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 10 के अनुसार नागरिकता का बना रहना संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन तो है, किंतु इसका तात्पर्य यह नहीं है कि संसद बिना किसी विधायी प्रक्रिया या मनमाने ढंग से किसी भी नागरिक की नागरिकता छीन सकती है; इसके लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित कानूनी और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 7 के तहत पाकिस्तान जाने वाले और वापस लौटने वाले व्यक्तियों के लिए पंजीकरण की शर्त अनुच्छेद 6 के अंतर्गत नहीं बल्कि अनुच्छेद 7 के अपने विशिष्ट प्रावधानों और परंतुक (Proviso) के तहत नियंत्रित होती है, जिसके लिए भारत में पुनर्वास के परंतुक के अधीन विशेष शर्तों को पूरा करना होता है। कथन 3 पूरी तरह सत्य है; अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के संबंध में व्यापक अधिकार देता है और अनुच्छेद 245 के साथ पढ़ने पर संसद की विधायी शक्ति को 'एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल ऑपरेशन' (राज्यक्षेत्रातीत प्रभाव) के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। विषय की अधिक विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन कर सकते हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि किसी राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा इनमें से किसी भी आयोग के आधे से अधिक सदस्यों के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उन्होंने नियुक्ति की तिथि से ठीक पहले भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्षों तक पद धारण किया हो।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य या अध्यक्ष को केवल कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है, और राष्ट्रपति के आदेश के लिए सर्वोच्च न्यायालय की संस्तुति आवश्यक होती है, बशर्ते राष्ट्रपति द्वारा ऐसा मामला जाँच के लिए उच्चतम न्यायालय को भेजा गया हो और न्यायालय ने अपनी जाँच के पश्चात हटाने की सलाह दी हो।
3. अनुच्छेद 321 के अनुसार, संसद या किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधियों के माध्यम से क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे को बढ़ाया जा सकता है, किंतु राज्य लोक सेवा आयोग के कृत्यों के दायरे को किसी भी परिस्थिति में राज्यपाल के अनुमोदन से संसद द्वारा विस्तारित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त निवारक नजरबंदी (Preventive Detention) और अनुच्छेद 22 के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 22 किसी भी व्यक्ति को, जिसे गिरफ्तार किया गया है, यह अधिकार देता है कि वह गिरफ्तारी के कारणों से यथाशीघ्र अवगत कराए जाने के बिना अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और बचाव करने के अधिकार से वंचित न किया जाए, किंतु यह सुरक्षा उपाय शत्रु (Enemy) अन्य देशों के नागरिकों या निवारक नजरबंदी कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्तियों पर लागू नहीं होता है।
2. निवारक नजरबंदी के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को तीन महीने से अधिक समय तक तब तक निरुद्ध नहीं रखा जा सकता है, जब तक कि किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के स्तर के व्यक्तियों से गठित सलाहकार बोर्ड (Advisory Board) ने इस अवधि को बढ़ाने के लिए पर्याप्त कारण प्रतिवेदित न कर दिया हो।
3. संसद को विधि द्वारा यह निर्धारित करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है कि किसी व्यक्ति को निवारक नजरबंदी कानून के अंतर्गत सलाहकार बोर्ड की राय प्राप्त किए बिना अधिकतम कितने समय तक निरुद्ध रखा जा सकता है, तथा ऐसा निरोध किस वर्ग के मामलों में लागू होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान सभा में सदस्य संख्या?
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भारतीय संविधान सभा के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के कुल 389 सदस्यों में से 296 सदस्य ब्रिटिश भारत से और 93 सदस्य देशी रियासतें से आने थे, जिनमें ब्रिटिश भारत के 296 सदस्यों में से 292 गवर्नरों के प्रांतों से और 4 मुख्य कमिश्नर क्षेत्रों (दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कूर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) से थे।
2. संविधान सभा के निर्वाचन में प्रत्येक प्रांत को उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं, जहाँ सामान्य, मुस्लिम और सिख—इन तीन प्रमुख समुदायों में सीटों का आबंटन किया गया था, और प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं में उस समुदाय के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया गया था।
3. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, जिसमें संविधान सभा का अस्तित्व समाप्त हो गया और उसने तुरंत भंग होकर भारत की 'अंतरिम संसद' (Provisional Parliament) के रूप में कार्य करना बंद कर दिया, क्योंकि उसी दिन भारत के पहले आम चुनावों के बाद निर्वाचित संसद का गठन हो चुका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में अब तक वित्तीय आपातकाल कितनी बार लगाया गया है?
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