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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के आपसी संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है, किंतु इस निर्वाचन प्रक्रिया में राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों को कोई भी भूमिका प्राप्त नहीं होती है।
  2. 2. अनुच्छेद 67(b) के प्रावधान के तहत उपराष्ट्रपति को उसकी पदावधि (5 वर्ष) पूरी होने से पहले केवल तभी उसके पद से हटाया जा सकता है जब राज्यसभा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से इस आशय का प्रस्ताव पारित करे और लोकसभा उस प्रस्ताव से सहमत हो, तथा इस प्रक्रिया के लिए राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव प्रस्तुत करने से चौदह दिन पूर्व उपराष्ट्रपति को लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
  3. 3. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक एवं संवैधानिक अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित समस्त मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है, और प्रधानमंत्री की मृत्यु या पदत्याग की स्थिति में मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन सही हैं। विस्तार से अध्ययन करने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर विजिट करें।

कथन 1 का विश्लेषण: संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा होता है। इसमें संसद के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं, जबकि राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को इसमें कोई अधिकार नहीं होता (राष्ट्रपति के चुनाव के विपरीत)।

कथन 2 का विश्लेषण: अनुच्छेद 67(b) के तहत उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही सबसे पहले लाया जा सकता है। इसके लिए राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) की आवश्यकता होती है और लोकसभा की सहमति जरूरी है। इसके साथ ही 14 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।

कथन 3 का विश्लेषण: अनुच्छेद 75(3) मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करता है। प्रधानमंत्री सरकार का केंद्र बिंदु होता है; अतः प्रधानमंत्री की मृत्यु या त्यागपत्र से पूरी मंत्रिपरिषद स्वतः समाप्त (Dissolve) हो जाती है।
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