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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संबंधों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को किसी राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा करने की शक्ति प्राप्त नहीं होती है, भले ही वह मामला राज्य विधि के अंतर्गत ही क्यों न आया हो।
- 2. अनुच्छेद 167 के अनुसार, राज्य के मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर राज्य के प्रशासन से संबंधित जानकारी और विधายक प्रस्तावों की सूचना भी उपलब्ध कराए।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अंतर्गत छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातीय कल्याण के लिए पृथक् से एक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, और इसके साथ ही बिहार राज्य को भी इस विशेष प्रावधान के अंतर्गत शामिल किया गया था, जिसे बाद में 94वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2006 द्वारा इस अनिवार्य सूची से हटा दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर राज्य विधि के विरुद्ध दिए गए दंड को क्षमा करने की शक्ति प्राप्त है। हालाँकि राज्यपाल के पास मृत्युदंड को क्षमा करने की शक्ति नहीं होती है (यह केवल राष्ट्रपति के पास है), लेकिन राज्यपाल को न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्युदंड के मामले में 'स्थगन' (Reprieve) या 'निलंबन' जैसी राहत देने की शक्ति होती है, किंतु कथन में 'मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा करने' के संदर्भ में यह आंशिक रूप से सही होते हुए भी तकनीकी रूप से राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों का अंतर स्पष्ट करता है; तथापि, राज्यपाल को मृत्युदंड को क्षमा करने की शक्ति वास्तव में प्राप्त नहीं है। परंतु कथन 3 असत्य है क्योंकि 94वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2006 द्वारा बिहार को इस सूची से हटाया नहीं गया था, बल्कि इस संशोधन के माध्यम से 'बिहार' राज्य को इस अनिवार्य प्रावधान से बाहर कर दिया गया और इसके स्थान पर झारखंड तथा छत्तीसगढ़ को इसमें जोड़ा गया था, जिससे अब इस प्रावधान के तहत छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्य शामिल हैं, जबकि मूल रूप से इसमें बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा शामिल थे। अतः केवल कथन 2 ही पूर्णतः सत्य है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, जिसमें मूल रूप से एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों के प्रावधान की व्यवस्था संविधान निर्माताओं द्वारा की गई थी।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग, सरकारी धन व विज्ञापनों के दुरुपयोग को रोकने तथा राजनीतिक दलों के वैतनिक ऑडिट (Auditing of Accounts) का सुझाव दिया था।
3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए जाने वाले खर्च की अधिकतम सीमा तय की जाती है, और इस सीमा का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को अयोग्य ठहराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग होगा, किंतु दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि उनमें से उस राज्य के लिए जो संघ की संसद से इस आशय का अनुरोध करता है, एक संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) की स्थापना की जाए, और ऐसा आयोग राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा सृजित किया जाता है।
2. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य को केवल राष्ट्रपति द्वारा, उच्चतम न्यायालय की उस जाँच के आधार पर जो अनुच्छेद 317 में विहित प्रक्रिया के अनुसार की गई हो, साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, जिसके लिए उच्चतम न्यायालय का प्रतिवेदन राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपने पद की अवधि समाप्त होने पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के पात्र होते हैं, किंतु किसी अन्य सरकारी नियोजन के पात्र नहीं होते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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अविश्वास प्रस्ताव किस सदन में आता है?
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भारत के पहले राष्ट्रपति कौन थे?
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों को जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, और यह शक्ति विशेष रूप से उन राज्यों पर लागू होती है जो पहले से भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों के आंतरिक पुनर्गठन से संबंधित अधिकार आते हैं।
2. अनुच्छेद 3 के अनुसार किसी भी राज्य का क्षेत्र बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजे और राज्य द्वारा दी गई सिफारिशें या राय राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 4 के यह प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित बनाई गई कोई भी विधि अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए संविधान संशोधन नहीं समझी जाएगी, जिसका तात्पर्य यह है कि ऐसी विधियों को साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा पारित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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