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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति (Proportional Representation by means of Single Transferable Vote) के माध्यम से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं, और प्रत्येक दस लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि का चुनाव किया गया था।
- 2. संविधान सभा आंशिक रूप से चुनी हुई और आंशिक रूप से नामांकित (Partly elected and partly nominated) निकाय थी, क्योंकि रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों का चयन संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा किया जाना था, न कि जनता द्वारा निर्वाचित होकर आना था।
- 3. वर्ष 1946 में आयोजित संविधान सभा के चुनावों में मुस्लिम लीग ने भाग लिया था और उसे कुल सीटों में से भारी बहुमत प्राप्त हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग के असहयोग के कारण ही अंततः भारत के विभाजन और पाकिस्तान के लिए एक पृथक् संविधान सभा के गठन की मांग को स्वीकार करना पड़ा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया गया था। यह चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) के आधार पर हुआ था और इसमें लगभग दस लाख की आबादी पर एक सीट का अनुपात तय किया गया था। कथन 2 सही है: संविधान सभा एक आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से मनोनीत (या नामांकित) निकाय थी। ब्रिटिश प्रांतों के सदस्यों का चुनाव हुआ था, जबकि देशी रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों को संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा नामित किया जाना था। कथन 3 गलत है: वर्ष 1946 के चुनावों में मुस्लिम लीग ने भाग तो लिया था (और उसे 73 सीटें मिली थीं), परंतु कुल सीटों में उसे बहुमत नहीं मिला था (कांग्रेस को 208 सीटें मिली थीं)। मुस्लिम लीग ने बाद में संविधान सभा की बैठकों का बहिष्कार किया था और पाकिस्तान के लिए अलग संविधान सभा की मांग पर अड़ी रही, न कि लीग के भारी बहुमत के कारण विभाजन हुआ बल्कि उसके बहिष्कार और राजनीतिक दबाव के कारण ऐसा हुआ। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को अमेरिकी क्रांति से लिया गया है।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से माना था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का अंग है और विधायिका इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते यह संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 360' के अंतर्गत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) की घोषणा और उसके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यदि राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में है, तो वह वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
2. वित्तीय आपातकाल की घोषणा करने वाली उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और लोकसभा के विघटन की स्थिति में यह उद्घोषणा कभी भी स्वतः समाप्त नहीं होती जब तक कि नया सदन इसका अनुमोदन न कर दे।
3. वित्तीय आपातकाल के दौरान, संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत भारत के सभी या किसी भी वर्ग के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कमी करने के निर्देश दिए जा सकते हैं, तथा राज्यों के विचार के लिए आरक्षित रखे गए धन विधेयकों या अन्य वित्तीय विधेयकों पर राष्ट्रपति द्वारा विचार करने के विशेष निर्देश दिए जा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के वित्तीय प्रबंधन, लेखा-परीक्षण (Audit) तथा वित्त आयोग की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार राज्यपाल प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति की पुनरावलोकन करने के लिए एक राज्य वित्त आयोग का गठन करेगा, जिसकी संरचना और सदस्यों की योग्यता के निर्धारण की शक्ति पूर्णतः संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होती है।
2. राज्य वित्त आयोग यह सिफारिश करता है कि राज्य द्वारा एकत्रित करों, शुल्कों, टोल और फीसों का राज्य और पंचायतों के बीच किस प्रकार वितरण किया जाए तथा पंचायतों को कौन-से कर सौंपे जा सकते हैं।
3. संविधान के भाग IX में पंचायतों के खातों की सम्यक जाँच (Audit) और रख-रखाव के संबंध में संसद को यह शक्ति दी गई है कि वह विधि बनाकर पंचायतों के खातों के लेखा-परीक्षण के लिए व्यापक नियम और उपबंध निर्धारित कर सके, क्योंकि इस विषय पर राज्य विधानमंडल को कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है?
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