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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अपीलीय अधिकारिता, रिट अधिकारिता तथा संविधान की व्याख्या से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 136 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र के किसी न्यायालय या अधिकरण (Tribunal) द्वारा किसी भी वाद या मामले में दिए गए किसी निर्णय, डिक्री, निर्धारण, सेंटेंस या आदेश की अपील के लिए 'विशेष अनुमति' (Special Leave to Appeal) प्रदान करने की विवेकपरायण शक्ति प्राप्त है, और सैन्य न्यायालयों (Armed Forces Tribunals) के निर्णय इस अधिकारिता के पूर्ण अपवाद हैं तथा उनके विरुद्ध इस अनुच्छेद के तहत अपील नहीं की जा सकती।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण जैसी रिट जारी कर सकता है, तथा इस अधिकारिता के प्रयोग का क्षेत्र केवल उन मामलों तक सीमित है जहाँ किसी व्यक्ति के मूल अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो, और न्यायालय सामान्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर इस अनुच्छेद के तहत रिट जारी नहीं कर सकता।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने की उसकी शक्ति संविधान के किसी भी सांविधिक कानून के उपबंधों को दरकिनार या अतिक्रमित कर सकती है, बशर्ते वह आदेश देश में सामाजिक-आर्थिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पारित किया गया हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 136 के अंतर्गत 'विशेष अनुमति अपील' की शक्ति में सैन्य न्यायालयों (Court Martial) को छोड़कर भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी न्यायालय या अधिकरण द्वारा दिए गए निर्णय के विरुद्ध अपील सुनने की असीमित शक्ति उच्चतम न्यायालय में निहित है, किंतु सैन्य मामलों (Armed Forces) के संबंध में यह आंशिक रूप से विवादास्पद रहा है, हालांकि संविधान पाठ्यपुस्तक के अनुसार अनुच्छेद 136 के तहत सैन्य अधिकरणों के निर्णयों पर भी अपील की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन सामान्यतः सैन्य न्यायालयों से जुड़े मामलों में उच्चतम न्यायालय सीधे हस्तक्षेप से बचता है; मुख्य रूप से सैन्य न्यायालयों के निर्णय इस व्यापक दायरे के पूर्ण अपवाद नहीं हैं क्योंकि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम के तहत भी अपील का प्रावधान है। कथन 2 पूरी तरह सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, सामान्य विधिक अधिकारों के लिए उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 के तहत) जाया जाता है। कथन 3 आंशिक रूप से भ्रामक है क्योंकि अनुच्छेद 142 के तहत 'पूर्ण न्याय' करने की शक्ति का प्रयोग करते समय उच्चतम न्यायालय संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी मान्य कानून के सीधे प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकता, बल्कि वह कानूनों के अभाव या कमियों की स्थिति में अंतराल को भरने के लिए इसका उपयोग करता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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