त्वरित लिंक्स
Indian Polity
14 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय वित्तीय एवं प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्यीय परिषद्' की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि ऐसी परिषद् की स्थापना से लोकहित होगा, तो वह संघ और राज्यों के बीच अथवा राज्यों के आपसी विवादों की जाँच करने, उन पर सलाह देने तथा सामान्य हित के विषयों की बेहतर जाँच और विचार-विमर्श करने के लिए इसका गठन कर सकता है।
- 2. अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की वर्ष 1988 की मुख्य संस्तुतियों के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में की गई थी, जिसके तहत वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा इसे एक स्थायी निकाय (Permanent Body) के रूप में स्थापित किया गया, तथा इसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं।
- 3. अंतर-राज्यीय परिषद् की संरचना के अंतर्गत सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के राज्यपाल या प्रशासक, तथा प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कैबिनेट स्तर के छह मंत्री इसके स्थायी सदस्य होते हैं, और इस परिषद् द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय या संस्तुति केंद्र और राज्य सरकारों के लिए कानूनी रूप से पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को लोकहित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की व्यापक शक्ति दी गई है। यह परिषद् राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और उन पर सलाह देने के साथ-साथ संघ और राज्यों के सामान्य हित से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का कार्य करती है। कथन 2 सही है: सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) ने अपनी रिपोर्ट में अनुच्छेद 263 के तहत एक स्वतंत्र और स्थायी 'अंतर-राज्यीय परिषद्' के गठन की जोरदार वकालत की थी। इसी संस्तुति पर अमल करते हुए जनता दल सरकार द्वारा वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से इसे औपचारिक रूप से स्थापित किया गया, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। कथन 3 गलत है: अंतर-राज्यीय परिषद् मुख्य रूप से एक 'सलाहकार निकाय' (Advisory Body) है, न कि कोई न्यायिक या निर्णय लेने वाला निकाय। इसके द्वारा दी गई संस्तुतियाँ या निर्णय केंद्र और राज्यों की सरकारों के लिए बिल्कुल भी बाध्यकारी (Binding) नहीं होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का अधिकार किसको है?
→
भारत का प्रथम लोकपाल कौन था?
→
भारतीय संविधान में प्रथम संशोधन किस वर्ष किया गया था?
→
भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इसमें अंग्रेजी भाषा को शामिल नहीं किया गया है।
2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा के संबंध में उपबंध किए गए हैं, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा, तथा इसके साथ ही संविधान में अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए संसद को विधि बनाने की शक्ति दी गई थी, किंतु न्यायालयों की भाषा के संबंध में विशेष उपबंध अनुच्छेद 348 में किए गए हैं।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, 'दल-बदल के आधार पर अयोग्यता के उपबंध' से संबंधित है, और इसके तहत किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय लेने की अंतिम शक्ति सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) में निहित होती है, जिसके न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) का अधिकार वर्ष 1992 के 'किहोटो होलोहन वाद' के पश्चात समाप्त कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य वित्तीय व प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच विवादों की जाँच करना, उन पर सलाह देना तथा ऐसे विषयों पर चर्चा करना है जिनमें राज्यों या केंद्र और राज्यों के साझा हित हों।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसका उल्लेख मूल संविधान में 1950 से ही था, तथा प्रधानमंत्री इस परिषद् के पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं।
3. सरकारीिया आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् का औपचारिक गठन किया गया था, और यह परिषद् एक न्यायिक अधिकरण (Adjudicatory Body) की तरह राज्यों के बीच जल-विवादों पर अंतिम और बाध्यकारी निर्णय देने की शक्ति रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.