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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'संविधान (पंजीकरण) नियम' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination) हो जाती है, और यह नियम केवल वयस्क नागरिकों पर लागू होता है, अवयस्क बच्चों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 के अंतर्गत भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) जो भारत में सामान्य रूप से निवास कर रहे हैं, वे पंजीकरण (Registration) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उन्होंने आवेदन देने से ठीक पहले कम से कम सात वर्षों तक भारत में निवास किया हो।
  3. 3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 और उसके उपरांत बनाए गए संशोधनों के पश्चात, भारत के संविधान का भाग II (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता से जुड़े संपूर्ण कानून देश के सभी केंद्रशासित प्रदेशों और राज्यों पर पूर्ण रूप से लागू होते हैं, तथा संसद को यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति से संबंधित किसी भी विषय पर कानून बना सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 9 के अंतर्गत स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता अर्जित करने पर भारतीय नागरिकता समाप्त होने का नियम केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है; इसके व्यापक विधिक निहितार्थ हैं और अधिनियम के प्रावधानों के तहत पारिवारिक व अन्य स्थितियों पर भी विचार किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5(1)(a) के तहत भारतीय मूल के व्यक्ति पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता के पात्र हैं, बशर्ते वे आवेदन से पूर्व निर्धारित समयावधि (वर्तमान में संशोधनों के अधीन सात वर्ष) तक भारत में निवास कर चुके हों। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 11 के अनुसार संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के विनियमन की संपूर्ण शक्ति प्राप्त है और भारतीय संविधान के भाग II के प्रावधान देश के संपूर्ण राज्यक्षेत्र पर लागू होते हैं। अधिक जानने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ सकते हैं।
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→ भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, क्षेत्राधिकार तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट (Writ) अधिकारिता, उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत और व्यापक है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी 'अन्य प्रयोजन' (जैसे सामान्य कानूनी अधिकारों के हनन पर) के लिए भी रिट जारी कर सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्यपाल द्वारा की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए यह अनिवार्य है कि व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो तथा संघ या राज्य की सेवा में कोई अन्य सरकारी अधिकारी न हो। 3. जिला न्यायालयों से भिन्न अन्य अधीनस्थ न्यायालयों (जैसे मुंसिफ न्यायालय आदि) की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके नियमों के तहत की जाती है, तथा राज्यों के न्यायिक सेवा पर नियंत्रण (जिसमें पोस्टिंग और पदोन्नति शामिल है) संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत पूर्ण रूप से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 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