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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 13(2) के अनुसार, राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, और इस प्रकार बनाई गई प्रत्येक विधि शून्य होगी, बशर्ते वह उल्लंघन की मात्रा तक शून्य हो (आच्छादन का सिद्धांत - Doctrine of Eclipse)।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद (1950)' में अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) की संकीर्ण व्याख्या को स्वीकार किया गया था, किंतु बाद में 'मेनका गांधी वाद (1978)' में न्यायालय ने इसे पलटते हुए अमेरिकी संविधान के समरूप 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) के सिद्धांतों को अनिवार्य रूप से शामिल करते हुए इसके दायरे का अभूतपूर्व विस्तार किया।
- 3. अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय को और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता का दायरा (Territorial and Subject-matter Jurisdiction) मूल अधिकारों के प्रवर्तन के मामले में उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक व्यापक और विस्तृत है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि आच्छादन का सिद्धांत (Doctrine of Eclipse) मुख्य रूप से संविधान पूर्व की विधियों (Pre-constitutional laws) पर लागू होता है जो मूल अधिकारों से असंगत होने के कारण पूर्णतः समाप्त नहीं होतीं, बल्कि निष्क्रिय (Ajar) हो जाती हैं; जबकि संविधान के पश्चात की विधियों (Post-constitutional laws) के मामले में 'पृथक्करणीयता का सिद्धांत' (Doctrine of Severability) और अनुच्छेद 13(2) के अंतर्गत 'शून्यता' का नियम लागू होता है। कथन 2 सही है, मेनका गांधी वाद (1978) ने अनुच्छेद 21 के दायरे में प्राकृतिक न्याय और उचित प्रक्रिया के तत्वों को समाहित किया। कथन 3 सही है, अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही नहीं बल्कि अन्य कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं, जिससे उनकी अधिकारिता का क्षेत्र व्यापक हो जाता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान सभा के गठन और इसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का चयन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन के आधार पर किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों के साथ-साथ देशी रियासतों के प्रतिनिधियों को भी मनोनीत किया गया था।
2. 'माउंटबेटन योजना' (3 जून 1947) के तहत भारत के विभाजन के पश्चात संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या को घटाकर 299 कर दिया गया था, जिसमें से ब्रिटिश भारत के लिए 229 और देशी रियाسतों के लिए 70 प्रतिनिधि निर्धारित किए गए थे।
3. संविधान सभा की कुल महिला सदस्यों की संख्या 15 थी, जिनमें से 'दक्षयानी वेलायुडन' एकमात्र ऐसी महिला सदस्य थीं जो अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) वर्ग से संबंधित थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य विधानसभा का नेता कौन होता है?
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आरबीआई का राष्ट्रीयकरण?
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भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों की अवधारणा किस देश के संविधान से ली गई है?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा इनमें से प्रत्येक सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपने पद पर बना रहता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के उपबंधों के तहत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य क्यों न हो, और राज्यपाल को राज्य आयोग के किसी सदस्य को हटाने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं होती है।
3. अनुच्छेद 318 के अंतर्गत राष्ट्रपति को संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों के नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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