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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के गठन, स्वतंत्रता, सदस्यों की पदावधि और उनके सेवा की शर्तों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल अपने पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) होता है, बशर्ते किसी राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह आयु सीमा पैंसठ के स्थान पर बासठ वर्ष निर्धारित की गई है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही राष्ट्रपति के आदेश से उसके पद से हटाया जा सकता है, तथा कदाचार के ऐसे प्रत्येक मामले में राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय को जाँच के लिए भेजा जाना अनिवार्य है और उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
- 3. अनुच्छेद 319 के उपबंधों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) का पात्र नहीं होता है, किंतु राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए पूर्णतः पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के सदस्यों के लिए आयु सीमा 62 वर्ष निर्धारित की गई है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत जब राष्ट्रपति किसी आयोग के सदस्य या अध्यक्ष को कदाचार के आधार पर हटाते हैं, तो उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जाँच के उपरांत दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी (Binding) होती है, किंतु यह प्रावधान केवल 'कदाचार' के लिए ही नहीं बल्कि दिवालिया होने, अपनी पदावधि के दौरान अपने पद के कर्तव्यों के बाहर किसी अन्य लाभ के नियोजन में लगने, या राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक infirmity के आधार पर भी लागू होता है; इसके अतिरिक्त, यदि मामला कदाचार का है तो SC की जाँच अनिवार्य है। हालांकि, मुख्य रूप से यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि न्यायालय की सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है, परंतु यहाँ कथन में दोष यह है कि अनुच्छेद 317(3) के अन्य आधारों (जैसे दिवालिया होना या सवेतन अन्य नियोजन में लगना) के लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच अनिवार्य नहीं होती है, केवल कदाचार के मामलों में ही सुप्रीम कोर्ट की जाँच आवश्यक है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 319 के अनुसार, UPSC का अध्यक्ष अपने पद पर दोबारा नियुक्त नहीं हो सकता और किसी अन्य सरकारी नियोजन के पात्र नहीं होता। SPSC का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है, लेकिन भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन अन्य किसी नौकरी के पात्र नहीं होते।
अधिक गहन अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स देख सकते हैं।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत जब राष्ट्रपति किसी आयोग के सदस्य या अध्यक्ष को कदाचार के आधार पर हटाते हैं, तो उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जाँच के उपरांत दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी (Binding) होती है, किंतु यह प्रावधान केवल 'कदाचार' के लिए ही नहीं बल्कि दिवालिया होने, अपनी पदावधि के दौरान अपने पद के कर्तव्यों के बाहर किसी अन्य लाभ के नियोजन में लगने, या राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक infirmity के आधार पर भी लागू होता है; इसके अतिरिक्त, यदि मामला कदाचार का है तो SC की जाँच अनिवार्य है। हालांकि, मुख्य रूप से यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि न्यायालय की सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है, परंतु यहाँ कथन में दोष यह है कि अनुच्छेद 317(3) के अन्य आधारों (जैसे दिवालिया होना या सवेतन अन्य नियोजन में लगना) के लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच अनिवार्य नहीं होती है, केवल कदाचार के मामलों में ही सुप्रीम कोर्ट की जाँच आवश्यक है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 319 के अनुसार, UPSC का अध्यक्ष अपने पद पर दोबारा नियुक्त नहीं हो सकता और किसी अन्य सरकारी नियोजन के पात्र नहीं होता। SPSC का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है, लेकिन भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन अन्य किसी नौकरी के पात्र नहीं होते।
अधिक गहन अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स देख सकते हैं।
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) तथा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सकेगी जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी भी मौजूदा राज्य के क्षेत्र में परिवर्तन, उसकी सीमाओं या नाम बदलने की शक्ति प्रदान करता है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या उसके क्षेत्रफल व नाम में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बाद ही संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, और राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
3. 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए परामर्श के उपरांत, भारत के किसी भू-भाग को किसी अन्य विदेशी देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से विधि बनाना पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम (अनुच्छेद 368) की आवश्यकता को अनिवार्य कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 249 के अंतर्गत संसद को राज्य सूची (State List) के किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने की शक्ति प्रदान की गई है। इस विशेष प्रावधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस प्रकार का कानून बनाने के लिए राज्य सभा को उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य है।
2. इस उपबंध के तहत बनाया गया संसद का कानून अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए लागू रहता है, हालांकि इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।
3. राज्य सूची के इस विषय पर कानून बनाने की शक्ति केवल राज्य सभा के पास होती है, और लोकसभा इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं निभाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान में कितनी भाषाएं हैं?
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भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के तहत होती है?
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संसद सत्र कौन आहूत करता है?
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