त्वरित लिंक्स
Indian Polity
1 views
राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में, राज्यपाल की शक्तियों और मुख्यमंत्री के संवैधानिक उत्तरदायित्वों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल ऐसी सूचना मांगता है, तो वह उसे प्रदान करे, किंतु राज्यपाल अपनी मर्जी से किसी ऐसे विषय पर जानकारी नहीं मांग सकता जिस पर मंत्रिपरिषद ने विचार न किया हो।
- 2. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु यदि राज्य विधानमंडल का सत्र चल रहा हो या द्विसदनीय व्यवस्था में कोई एक सदन सत्र में हो, तब भी राज्यपाल उस समय अध्यादेश जारी कर सकता है यदि उसे यह विश्वास हो कि तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
- 3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, तथा महाधिवक्ता को राज्य के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और उसे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की कार्यवाही में बोलने तथा बिना मतदान के भाग लेने का संवैधानिक अधिकार होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 167 के अंतर्गत राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधान के प्रस्तावों से संबंधित किसी भी मामले की जानकारी मुख्यमंत्री से मांग सकता है, भले ही मंत्रिपरिषद ने उस पर औपचारिक रूप से विचार न किया हो। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 213 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार राज्यपाल अध्यादेश तभी प्रख्यापित कर सकता है जब राज्य विधानमंडल (या दोनों सदन यदि विधानमंडल द्विसदनीय है) सत्र में न हो; यदि सत्र चल रहा है, तो राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश पूरी तरह से शून्य और असंवैधानिक होगा। कथन 3 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 165 के तहत महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल करता है, वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, और अनुच्छेद 177 के अनुसार उसे राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में बोलने तथा कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है, बशर्ते उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। अधिक विस्तृत जानकारी और तैयारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकार और संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के आरंभिक (Original) क्षेत्राधिकार के तहत केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच के कानूनी विवाद आते हैं, किंतु यदि ऐसा कोई विवाद किसी ऐसी संधि, कर्रार या प्रसंविदा से उत्पन्न होता है जो संविधान के लागू होने से पहले की है और अभी भी प्रवृत्त है, तो उच्चतम न्यायालय इस आरंभिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 143 के अधीन राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि किसी सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय की राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि वह उस प्रश्न पर अपनी राय राष्ट्रपति को दे।
3. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के संबंध में 'न्यायाधीश जाँच अधिनियम, 1968' (Judges Inquiry Act, 1968) के तहत यदि लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है, तो इसके लिए कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं, जबकि राज्यसभा में इस प्रस्ताव को लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
आगत (Sensory) और निर्गत (Motor) तंत्रिकाएं कहाँ मिलती हैं?
→
भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner) कौन थे?
→
न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का अधिकार किसको है?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, शक्तियों तथा विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार, संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा कुल सदस्यों की संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवाद स्वरूप जम्मू-कश्मीर के समय इसके विशेष प्रावधान थे)।
3. धन विधेयक (Money Bill) केवल राज्य की विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; तथा विधान परिषद को किसी धन विधेयक को अपने पास अधिकतम 21 दिनों की अवधि तक रोकने का अधिकार होता है, जिसके पश्चात यदि वह इसे पारित नहीं करती है, तो विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.