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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना' की शक्ति प्राप्त है, जो कि उन विदेशी भू-भागों पर लागू होती है जो भविष्य में भारत के अधिग्रहण में आ सकते हैं, जबकि अनुच्छेद 3 भारतीय संघ के भीतर पहले से मौजूद राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है।
  2. 2. राज्यों के पुनर्गठन के लिए गठित 'राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग, 1953)' ने अपनी रिपोर्ट में भाषाई आधार को राज्यों के गठन का एकमात्र और सर्वोपरि आधार मानते हुए, बहु-राज्यीय भाषा के सिद्धांतों के आधार पर पूरे देश को चौदह राज्यों और छह संघ राज्य क्षेत्रों में पुनर्गठित करने की संस्तुति की थी।
  3. 3. संसद द्वारा अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण, उसके क्षेत्र या नाम में परिवर्तन से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता, तथा राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, भले ही उस राज्य विधानमंडल की राय संसद पर बाध्यकारी न हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 2 संसद को ऐसे राज्यों के संघ में प्रवेश या स्थापना की शक्ति देता है जो पहले से भारत का हिस्सा नहीं हैं (अर्थात विदेशी क्षेत्र), जबकि अनुच्छेद 3 मौजूदा भारतीय राज्यों के आंतरिक पुनर्गठन (क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन) से संबंधित है। कथन 2 गलत है क्योंकि फजल अली आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग, 1953) ने 'एक राज्य, एक भाषा' के सिद्धांत को अस्वीकार कर दिया था; उसने भाषाई समरूपता को एक कारक माना, किंतु प्रशासनिक सुविधा, आर्थिक स्थिरता और देश की एकता व अखंडता को प्राथमिकता दी थी। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 3 के तहत प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति अनिवार्य होती है और राष्ट्रपति को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए विधेयक भेजना होता है, यद्यपि राज्य की वह राय संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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