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Indian Polity
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भारतीय संसद के गठन, लोकसभा और राज्यसभा की संरचना तथा विधाई प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद के तीन अंग हैं—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा, और यद्यपि राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है और न ही वह संसद के सत्र में बैठता है, तथापि संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बन सकता जब तक राष्ट्रपति उसे अपनी अनुमति (Assent) प्रदान न कर दे।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 83(2) के प्रावधानों के तहत लोकसभा का कार्यकाल उसकी प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष होता है, और इसे समय से पहले विघटित करने की शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती है, तथा आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा के प्रवर्तन में रहने के दौरान संसद विधि द्वारा लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष के लिए किसी भी सीमा तक बढ़ा सकती है।
  3. 3. अनुच्छेद 100 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों की बैठकों के लिए कोरम (गणपूर्ति) कुल सदस्य संख्या का दसवाँ हिस्सा निर्धारित किया गया है, और यदि सदन की बैठक के दौरान कोरम पूरा नहीं होता है, तो पीठासीन अधिकारी का यह वैधानिक दायित्व है कि वह सदन को स्थगित कर दे या बैठक को तब तक के लिए निलंबित कर दे जब तक कोरम पूरा न हो जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 79 के तहत संसद के तीन अंग राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा हैं। राष्ट्रपति किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता, लेकिन विधायी प्रक्रिया के तहत उसकी अनुमति के बिना कोई विधेयक कानून नहीं बन सकता। कथन 2 गलत है क्योंकि आपातकाल के दौरान संसद विधि द्वारा लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में केवल एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है, और यह वृद्धि आपातकाल की समाप्ति के बाद किसी भी दशा में छह महीने की अवधि से अधिक समय तक जारी नहीं रह सकती है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 100 के अनुसार संसद के प्रत्येक सदन की बैठक के लिए कोरम सदन के सदस्यों की कुल संख्या का दसवाँ भाग होता है, और कोरम के अभाव में पीठासीन अधिकारी को सदन को स्थगित करना पड़ता है या बैठक निलंबित करनी पड़ती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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