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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रक्रिया और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर ही प्रयोग की जा सकती है, किंतु राज्यपाल अपनी इस विधाई शक्ति का प्रयोग किसी भी स्थिति में तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसे ऐसा अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संстуति (Instruction) प्राप्त न हो गई हो, भले ही संबंधित विषय राज्य सूची का ही क्यों न हो।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर विधानसभा का विघटन किए जाने या बहुमत परीक्षण (Floor Test) कराए जाने से संबंधित निर्णय की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकती है कि राज्यपाल का निर्णय मालाफाइड (Malafide) या असंवैधानिक था, तथा विधानसभा के पटल पर ही सरकार के बहुमत का परीक्षण किया जाना संवैधानिक रूप से सर्वाधिक उपयुक्त माध्यम है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह स्पष्ट संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल किसी विशिष्ट विषय पर प्रशासनिक जानकारी मांगता है, तो मुख्यमंत्री के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसी सूचना राज्यपाल को उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि राज्यपाल की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति (अनुच्छेद 213) के तहत कुछ विशेष मामलों में (जैसे कि यदि वही उपबंध वाला विधेयक राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखे जाने पर अधिनियम नहीं बन सकता था) राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति आवश्यक होती है, किंतु सामान्यतः राज्य सूची के विषयों पर अध्यादेश जारी करने के लिए प्रत्येक मामले में राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति अनिवार्य नहीं होती है। कथन 2 सत्य है; एस.आर. बोम्बाई वाद (1994) में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि राज्यपाल द्वारा विधानसभा का विघटन या राष्ट्रपति शासन की संस्तुति न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है और बहुमत का परीक्षण राजभवन के बजाय विधानसभा के पटल (Floor Test) पर होना चाहिए। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह राज्य के प्रशासनिक और विधाई निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को दे। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का संदर्भ ले सकते हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की शक्तियों तथा मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है, जिसमें संसद के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं, किंतु राज्य विधानमंडलों के सदस्य इसमें शामिल नहीं होते हैं।
2. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संसद का उच्च सदन कौन सा है?
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संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता कौन करता है?
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