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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग और उससे संबंधित चुनाव सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन की जाती है, और सुप्रीम कोर्ट के 'अनूप बर्नवाल बनाम भारत संघ (2023)' के निर्णय के पश्चात इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश) की एक उच्च-स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अंतर्गत किसी भी उम्मीदवार को लोकसभा या राज्य विधानसभा के किसी आम चुनाव या उपचुनाव में एक साथ अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की वैधानिक अनुमति प्राप्त है, किंतु वर्ष 2024 में निर्वाचन आयोग द्वारा इस कानूनी प्रावधान को पूर्णतः असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है क्योंकि यह एक से अधिक सीट जीतने की स्थिति में उप-चुनाव के अनावश्यक वित्तीय बोझ को बढ़ाता है।
- 3. 'वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल' (VVPAT) मशीन के उपयोग को वैधानिक मान्यता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में 'संचालन (संशोधन) नियम, 2013' के माध्यम से 'कंडक्ट ऑफ़ इलेक्शन रूल्स, 1961' में संशोधन किया था, और सर्वोच्च न्यायालय ने 'सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2013)' वाद में यह स्पष्ट किया था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए ईवीएम के साथ वीवीपैट का प्रयोग अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 324(2) के अनुसार निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। अनूप बर्नवाल वाद (2023) में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के बाद, जब तक संसद कानून नहीं बनाती, एक उच्च-स्तरीय समिति (प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई) की संस्तुति पर इनकी नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। कथन 2 गलत है: हालांकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत एक उम्मीदवार को अधिकतम दो सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति आज भी कानूनी रूप से प्राप्त है, किंतु भारत निर्वाचन आयोग या सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे स्वतः 'असंविधानिक' घोषित नहीं किया गया है, बल्कि इसे निरस्त या संशोधित करने का अधिकार केवल संसद के पास है। कथन 3 सही है: वर्ष 2013 में 'कंडक्ट ऑफ़ इलेक्शन रूल्स, 1961' में संशोधन करके VVPAT को कानूनी रूप दिया गया था, और 'सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2013)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निष्पक्ष चुनाव के लिए इसके उपयोग को अपरिहार्य माना था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में वर्णित स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों तथा प्रस्तावना की विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' के आदर्शों को वर्ष 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' का आदर्श रूसी क्रांति पर आधारित है।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है।
3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर प्रतिबंध लगाती है, तथा इसकी प्रकृति गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) है, अर्थात इसके प्रावधानों को किसी भी न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'लोक सेवा आयोग' (Public Service Commission) से संबंधित है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता और अधीनस्थ न्यायपालिका के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार के भीतर आने वाले सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और यह अधीक्षण शक्ति केवल प्रशासनिक नियंत्रण तक ही सीमित है, इसमें न्यायिक अधीक्षण (Judicial Superintendence) शामिल नहीं है।
2. अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा राज्यपाल द्वारा यह अधिकार राज्य लोक सेवा आयोग के साथ विचार-विमर्श के बाद ही प्रयोग किया जाता है।
3. अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिसमें जिला न्यायालय और उसके अधीनस्थ अन्य सिविल न्यायालय शामिल हैं) पर नियंत्रण, जिसमें उनकी पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी देना शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
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