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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा के प्रावधानों, राजनीतिक दलों के नियमन तथा संविधान की अनुसूचियों एवं भागों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी, किंतु यह भी प्रावधान किया गया है कि संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की काल-अवधि तक यानी 1965 तक, सभी राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जारी रखा जा सकता है, और संसद को यह वैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 1965 के पश्चात भी अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को अधिकृत कर सके।
- 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार एक बार निर्वाचन आयोग द्वारा किसी राजनीतिक दल को पंजीकृत कर लिए जाने के बाद, आयोग को उस दल का पंजीकरण रद्द (De-register) करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
- 3. भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्योग्यता से संबंधित है, और इस अनुसूची के पैरा 7 के अंतर्गत पीठासीन अधिकारी द्वारा दलबदल के मामलों में लिए गए निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है, क्योंकि इसकी न्यायिक समीक्षा पूर्णतः वर्जित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी घोषित की गई है, तथा इसमें मूल रूप से 15 वर्ष (1965 तक) के लिए अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति दी गई थी, जिसे संसद द्वारा 'राजभाषा अधिनियम, 1963' के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। कथन 2 गलत है क्योंकि यद्यपि अधिनियम में प्रत्यक्ष शक्ति का अभाव था, किंतु सुप्रीम कोर्ट ने 'इंडियन नेशनल कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेल्फेयर' वाद में स्पष्ट किया कि यदि कोई दल धोखाधड़ी से पंजीकरण प्राप्त करता है तो आयोग उसका पंजीकरण रद्द कर सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि केशवानंद भारती और 'किहोटो होलोहाइन बनाम जाचिलू (1992)' वाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पीठासीन अधिकारी का निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है। अधिक गहन अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं के संरचनात्मक प्रावधानों, वार्ड समितियों और महानगर योजना समितियों (Metropolitan Planning Committee) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु यदि किसी नगरीय क्षेत्र में औद्योगिक प्रतिष्ठान कार्यरत हैं और राज्यपाल लोक सूचना के माध्यम से उसे औद्योगिक नगरी घोषित करता है, तो वहां नगरपालिका का गठन करना अनिवार्य नहीं होता है।
2. अनुच्छेद 243-S के अंतर्गत दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए प्रत्येक राज्य में एक महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो उस महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजनाएं तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य महानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
3. अनुच्छेद 243-R के अनुसार नगरपालिकाओं की सभी सीटें नगरपालिकाओं के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरी जाएंगी, किंतु राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा लोकसभा, राज्य विधानसभा के सदस्यों तथा राज्य विधानपरिषद के सदस्यों को नगरपालिकाओं में प्रतिनिधित्व प्रदान कर सकता है, साथ ही उन व्यक्तियों को भी विशेष ज्ञान या अनुभव के आधार पर बिना मतदान के अधिकार के नामित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रारूप समिति के अध्यक्ष?
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भारतीय संविधान में आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के संचालन को आसान बनाने के लिए यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति संपूर्ण देश में या उसके किसी एक विशिष्ट भाग में भी एक साथ राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'मंत्रिमंडल' (Cabinet) की लिखित संस्तुति प्राप्त होने पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है, और इसके साथ ही 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द जोड़ा गया।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता, और यह सुरक्षात्मक प्रावधान मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में आपातकाल के अनुभवों के आधार पर और अधिक स्पष्ट किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना, उन पर बहस करना तथा ऐसे विषयों से संबंधित सलाह देना है जिनमें राज्यों या संघ और एक या अधिक राज्यों की समान रुचि हो।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है, और इसके निर्णयों या अनुशंसाओं की प्रकृति न्यायालयों के निर्णयों की तरह राज्यों और केंद्र सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती है।
3. सरकारीिया आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिश के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ शासित प्रदेशों के प्रशासक शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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