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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) के अंतर्गत यह निर्देशित किया गया है कि राज्य अपनी नीति का इस प्रकार संचालन करेगा कि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो जिससे जनसाधारण की सामूहिक भित्ति और भौतिक समृद्धि का सर्वोत्तम रूप से हितसाधन हो, और सर्वोच्च न्यायालय ने 'महानंद कौर बनाम पंजाब राज्य' और 'एस.आर. बोम्बाई वाद' के ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 38 और 39 में वर्णित सामाजिक-आर्थिक न्याय के सिद्धांतों को प्राप्त करने के लिए राज्य द्वारा निजी संपत्तियों का अधिग्रहण भी किया जा सकता है, जिसे अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 के उल्लघंन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है यदि ऐसा कानून अनुच्छेद 31C के दायरे में आता हो।
  2. 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग IV में कुछ नए नीति निर्देशक तत्व जोड़े गए थे, जिनमें अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता), अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी), और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन एवं वन्यजीवों की रक्षा) शामिल हैं, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में यह खंड जोड़ा गया कि राज्य, विशिष्ट रूप से आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा।
  3. 3. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और देश के विधि निर्माण में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है, तथापि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं बनाया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, यदि संसद द्वारा कोई ऐसा कानून बनाया जाता है जो नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से हो, तो न्यायालय उस कानून की संवैधानिकता का निर्धारण करते समय इस बात पर विचार कर सकता है कि वह कानून उन निर्देशक तत्वों के अनुपालन में है या नहीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को प्रभावी बनाने वाले कानूनों को अनुच्छेद 31C के तहत संरक्षण प्राप्त है (मूलतः 25वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था), किंतु इसे अनुच्छेद 14 और 19 के उल्लंघन से संरक्षण प्राप्त होने की व्याख्या केशवानंद भारती वाद और मिनर्वा मिल्स वाद के संदर्भ में सीमित की गई है, और 'महानंद कौर' जैसा कोई ऐतिहासिक वाद इस विशेष संदर्भ से जुड़ा नहीं है। कथन 2 पूर्णतः सत्य है क्योंकि 42वें संशोधन (1976) द्वारा अनुच्छेद 39A, 43A और 48A जोड़े गए थे तथा 44वें संशोधन (1978) द्वारा अनुच्छेद 38(2) जोड़ा गया जो आय की असमानताओं को कम करने से संबंधित है। कथन 3 भी सत्य है, क्योंकि अनुच्छेद 37 के अनुसार DPSP गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, किंतु न्यायिक समीक्षा के दौरान न्यायालय सामंजस्य और पूरकता के सिद्धांत के तहत इनका उपयोग कानूनों की वैधता जांचने में करते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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