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Indian Polity
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं की वित्तीय शक्तियों, कर-रोपण और वित्त आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के तहत राज्य का वित्त आयोग, जो अनुच्छेद 243-I के अंतर्गत गठित किया जाता है, नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और राज्यपाल को ऐसे सिद्धांतों की संस्तुति करता है जो नगरपालिकाओं द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीसों के निर्धारण तथा राज्य द्वारा संचित निधि से दिए जाने वाले सहायता-अनुदान (Grants-in-aid) को विनियमित करते हैं।
  2. 2. अनुच्छेद 243-X के अधीन राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा किसी नगरपालिका को उसके द्वारा संग्रहित और विनियोजित किए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीसों के अधिरोपण और संग्रहण के लिए अधिकृत कर सकता है, किंतु इसके लिए यह अनिवार्य है कि ऐसे कर केवल केंद्रीय सूची या समवर्ती सूची के विषयों पर ही आधारित होने चाहिए, राज्य सूची पर नहीं।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों और संवैधानिक उपबंधों के अनुसार, राज्य के वित्त आयोग द्वारा नगरपालिकाओं के संबंध में दी गई संस्तुतियों को राज्य सरकार के लिए अनिवार्य रूप से लागू करना बाध्यकारी होता है, और राज्य सरकार बिना किसी वैधानिक संशोधन के इनमें अपनी मर्जी से कोई फेरबदल नहीं कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243-Y के तहत (जो भाग IX-A के अंतर्गत आता है) राज्य का वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और राज्यपाल को करों, शुल्कों, टोल, फीसों तथा राज्य की संचित निधि से सहायता-अनुदान के संबंध में संस्तुतियाँ देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 243-X के तहत राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को उन करों, शुल्कों, टोल और फीसों के अधिरोपण के लिए अधिकृत करता है जो 'राज्य सूची' के विषयों से संबंधित होते हैं, न कि केंद्रीय या समवर्ती सूची से। कथन 3 गलत है क्योंकि राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियाँ प्रकृति से केवल 'सलाहकार' (Advisory) होती हैं, और उन्हें राज्य के मंत्रिमंडल या विधानमंडल द्वारा स्वीकार करना या न करना उनके विवेक पर निर्भर करता है, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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