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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा किया गया था, तथा इसमें ब्रिटिश प्रांतों के साथ-साथ देशी रियासतों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया था जहाँ रियासतों के प्रतिनिधियों को संबंधित शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था।
  2. 2. संविधान सभा द्वारा संविधान के प्रारूप पर विचार करने और उसे अंतिम रूप देने के लिए कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें कार्य संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
  3. 3. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, और उसी दिन संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भंग होकर भारत की 'अंतरिम संसद' (Provisional Parliament) के रूप में तब तक कार्य जारी रखा जब तक कि वर्ष 1951-52 के आम चुनावों के पश्चात भारत की पहली निर्वाचित संसद का गठन नहीं हो गया।

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर हुआ था। इसमें ब्रिटिश प्रांतों (296 सीटें) के साथ-साथ देशी रियासतों (93 सीटें) को भी प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया था, जिनके सदस्यों का मनोनयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था। कथन 2 असत्य है: संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल **22 बड़ी (मुख्य) समितियाँ** नहीं थीं, बल्कि कैबिनेट मिशन योजना के तहत कुल **अन्तरिम प्रक्रिया में मुख्य और छोटी समितियों को मिलाकर कई समितियाँ थीं जिनमें प्रारूप समिति, संघ शक्ति समिति, प्रांतीय संविधान समिति आदि प्रमुख थीं**, किंतु कुल मुख्य (बड़ी) समितियाँ 8 थीं (न कि 22)। (नोट: 22 समितियाँ नहीं बल्कि कुल लगभग 13-15 मुख्य समितियाँ और अन्य छोटी समितियाँ थीं, और विशिष्ट तथ्यात्मक त्रुटि के कारण यह कथन गलत माना जाता है)। कथन 3 सही है: संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई थी। इसी दिन सभा द्वारा डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया तथा संविधान सभा ने अंतरिम संसद के रूप में 26 जनवरी 1950 से लेकर नई संसद के गठन (1952) तक कार्य किया। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामले में तथा सभी मामलों में जहाँ दंड या दंडादेश मृत्युदंड (Death Sentence) होता है, क्षमादान देने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का प्रयोग करते समय राष्ट्रपति के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह मानना पूरी तरह अनिवार्य होता है, सिवाय उस स्थिति के जहाँ दया याचिका खारिज कर दी गई हो। 2. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों में 'परिहार' (Remission) का अर्थ दंड की प्रकृति को बदले बिना उसकी अवधि को कम करना है, जबकि 'विराम' (Respiration/Remission नहीं अपितु Reprieve/Remission) का अर्थ किसी विशेष परिस्थिति, जैसे कि अपराधी की शारीरिक अपंगता या महिला अपराधी के गर्भवती होने के कारण मूल दंड के स्थान पर कम कठोर दंड देना है। 3. अनुच्छेद 111 के अंतर्गत जब कोई साधारण विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति रोक सकता है और अपनी 'जेब वीटो' (Pocket Veto) शक्ति का प्रयोग करते अनिश्चित काल के लिए विधेयक को अपने पास रख सकता है, क्योंकि संविधान में ऐसी स्थिति के लिए राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर निर्णय लेने हेतु किसी भी समय-सीमा (Time Limit) का निर्धारण नहीं किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है? भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) तथा चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और ऐसे अन्य निर्वाचन आयुक्तों, यदि कोई हों, की नियुक्ति का प्रावधान है, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन नियुक्त किया जाता है। 2. वर्ष 1993 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात् निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया गया, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल हैं, और निर्णय लेते समय यदि मतों में भिन्नता हो, तो बहुमत का नियम लागू होता है जिसमें तीनों सदस्यों की शक्तियाँ और वेतन-भत्ते समान होते हैं। 3. 'दिनेश गोस्वामी समिति' (1990) का संबंध चुनाव सुधारों से था, जिसने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियम प्रणाली की सिफारिश की थी तथा सरकारी धन या वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की बात कही थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत अनुच्छेद 243-G में पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध कुल 29 कार्यात्मक विषयों पर विधायी शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपने का प्रावधान किया गया है। 2. प्रत्येक पंचायत स्तर पर सीटों के आरक्षण के संदर्भ में यह अनिवार्य किया गया है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या, पंचायत में कुल स्थानों की संख्या के उसी अनुपात में होगी जो उस क्षेत्र में उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात है, और इस प्रकार आरक्षित कुल सीटों में से कम-से-कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 3. राज्य की पंचायतों के लिए वित्त आयोग के गठन का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत किया गया है, जिसके अनुसार राज्यपाल हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और इस आयोग की सिफारिशों को मानना राज्य सरकार के लिए पूर्ण रूप से संवैधानिक रूप से बाध्यकारी (Mandatory) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनके विधिक आयामों तथा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों का विचार तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान में जोड़ा गया था, तथा मूल रूप से स्वर्ण सिंह समिति ने कर अदायगी (Payment of Taxes) को भी नागरिकों का एक कर्तव्य बनाने की संस्तुति की थी, जिसे संविधान संशोधन अधिनियम में शामिल नहीं किया गया था। 2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे, तथा यह विशिष्ट कर्तव्य मूल कर्तव्यों की सूची में सबसे पहला (क्रम संख्या 'क') स्थान रखता है। 3. यद्यपि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Non-justiciable) है, तथापि संसद को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधि बनाकर इनके उल्लंघन या अवहेलना के लिए यथारूप दंड या शास्ति (Penalty) आरोपित कर सकती है, जैसा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम जैसे कानूनों के माध्यम से किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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