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Indian Polity
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग पर एक साथ लागू की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह आंतरिक अशांति के आधार पर भी देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
- 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, और यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जा सकती है जब संघ के मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इस आशय का निर्णय लिखित रूप में राष्ट्रपति को संसूचित किया गया हो।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय के 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' के ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि 42वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 368 में जोड़े गए खंड (4) और (5), जो संसद की संविधान संशोधन की शक्ति को न्यायिक समीक्षा से बाहर करते थे, संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हैं और इसलिए असंवैधानिक हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल को देश के किसी एक भाग तक सीमित करने का प्रावधान तो जोड़ा गया था, किंतु आंतरिक अशांति के आधार पर आपातकाल लगाने का प्रावधान मूल संविधान में पहले से ही 'आंतरिक आपातकाल' के रूप में मौजूद था (जिसे बाद में 44वें संशोधन द्वारा 'सशस्त्र विद्रोह' से बदला गया)। कथन 2 सही है; 44वें संशोधन 1978 ने 'आंतरिक अशांति' को 'सशस्त्र विद्रोह' से प्रतिस्थापित किया और कैबिनेट की लिखित सलाह को अनिवार्य बनाया। कथन 3 भी सही है; मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक समीक्षा को संविधान का मूल ढांचा मानते हुए 42वें संशोधन के प्रावधानों को खारिज कर दिया था। अधिक गहन अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर जा सकते हैं।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों, विशेषाधिकारों और उनके कार्यालयों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त महान्यायवादी को भारत सरकार का मुख्य विधि अधिकारी होने के नाते देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, और उसे संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु वह संसद की किसी भी संयुक्त बैठक (Joint Sitting) में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार नहीं रखता है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से होने वाले सभी व्ययों की लेखा-परीक्षा करने का अनन्य अधिकार प्राप्त है, तथा संविधान के अनुच्छेद 149 के अनुसार संसद द्वारा विधि बनाकर उसे राज्यों के लेखाओं की परीक्षा करने का भी अधिकार दिया गया है, हालांकि उसकी सभी लेखा-परीक्षा रिपोर्टें सीधे राष्ट्रपति के माध्यम से संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं, न कि राज्यों के विधानमंडलों के समक्ष।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपने पद की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य कार्यालय या लाभ के पद (Office of Profit) को धारण करने के लिए पूर्णतः अपात्र (Ineligible) होता है, जो उसके पद की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए किया गया एक संवैधानिक प्रावधान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं के संरचनात्मक प्रावधानों, वार्ड समितियों और महानगर योजना समितियों (Metropolitan Planning Committee) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु यदि किसी नगरीय क्षेत्र में औद्योगिक प्रतिष्ठान कार्यरत हैं और राज्यपाल लोक सूचना के माध्यम से उसे औद्योगिक नगरी घोषित करता है, तो वहां नगरपालिका का गठन करना अनिवार्य नहीं होता है।
2. अनुच्छेद 243-S के अंतर्गत दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए प्रत्येक राज्य में एक महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो उस महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजनाएं तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य महानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
3. अनुच्छेद 243-R के अनुसार नगरपालिकाओं की सभी सीटें नगरपालिकाओं के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरी जाएंगी, किंतु राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा लोकसभा, राज्य विधानसभा के सदस्यों तथा राज्य विधानपरिषद के सदस्यों को नगरपालिकाओं में प्रतिनिधित्व प्रदान कर सकता है, साथ ही उन व्यक्तियों को भी विशेष ज्ञान या अनुभव के आधार पर बिना मतदान के अधिकार के नामित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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