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Indian Polity
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भारतीय निर्वाचन आयोग और देश में electoral funding (चुनावी वित्तपोषण) तथा चुनावी सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की व्यापक शक्ति प्राप्त है, किंतु इसके पास राजनीतिक दलों के पंजीकरण (Registration) को रद्द करने की कोई संवैधानिक या वैधानिक शक्ति नहीं है, क्योंकि यह अधिकार केवल उच्च न्यायालयों या केंद्र सरकार के पास निहित है।
  2. 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 29-C के अनुसार, राजनीतिक दलों को व्यक्तियों या कंपनियों से प्राप्त होने वाले बीस हजार रुपये से अधिक के सभी योगदानों (Contributions) का विवरण निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत करना अनिवार्य है, जिसके आधार पर आयोग चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय के 'कॉमन कॉज़ बनाम भारत संघ (1996)' और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों द्वारा अपने वित्तीय खातों का वार्षिक लेखा-परीक्षण (Audit) कराया जाना तथा उसे निर्वाचन आयोग को समय पर प्रस्तुत करना अनिवार्य वैधानिक आवश्यकता है, और आयोग को यह शक्ति प्राप्त है कि वह लेखा-परीक्षण में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित दल को मिलने वाले आयकर छूट के लाभ को विनियमित कर सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि वर्ष 1998 में सुप्रीम कोर्ट के 'इंडियन नेशनल कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेल्फेयर' वाद के निर्णय के अनुसार निर्वाचन आयोग को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण को रद्द (De-register) करने की शक्ति निहित है, यदि वह दल धोखाधड़ी से पंजीकृत हुआ हो, आंतरिक लोकतंत्र का उल्लंघन करता हो या संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लंघन करे। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। चुनावी सुधारों और राजनीतिक दलों के वित्तीय नियमन के विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में जोड़े गए प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में नया भाग IX जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसके तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली का गठन करना अनिवार्य किया गया है, बशर्ते उन राज्यों को छोड़कर जिनकी जनसंख्या बीस लाख से कम है, जिन्हें मध्यवर्ती स्तर के गठन से छूट दी गई है। 2. इस संशोधन के माध्यम से संविधान में ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 29 कार्यात्मक मदों (Functional Items) का उल्लेख किया गया है, जिन पर पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का अधिकार दिया गया है। 3. पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ता के लिए प्रत्येक राज्य के राज्यपाल द्वारा हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और राज्य की संचित निधि से पंचायतों को दिए जाने वाले अनुदानों के वितरण की संस्तुति करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रारूप समिति के अध्यक्ष? भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में नया 'भाग IX-A' जोड़ा गया है जिसका शीर्षक 'नगरपालिकाएँ' है, तथा इसके तहत अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल किए गए हैं और बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के 18 कार्यात्मक विषयों को रखा गया है। 2. नगरपालिकाओं के सभी तीनों स्तरों (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) पर राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए अध्यक्ष के पदों में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करना अनिवार्य किया गया है, और यह आरक्षण केवल सदस्यों के पदों तक ही सीमित है, अध्यक्ष (Mayor/Chairperson) के पदों पर लागू नहीं होता है। 3. महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee - MPC) का गठन संविधान के अनुच्छेद 243-ZE के तहत प्रत्येक ऐसे महानगरीय क्षेत्र के लिए किया जाता है जिसमें दो या दो से अधिक जिले शामिल हों और जिनकी कुल जनसंख्या दस लाख या उससे अधिक हो, तथा इस समिति के कम से कम दो-तिहाई सदस्य उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं और पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों में से ही चुने जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनैतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, किंतु इस अनुसूची में 'अंग्रेज़ी' और 'राजस्थानी' भाषाओं को अभी तक आधिकारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा से संबंधित उपबंध किए गए हैं, जिसके तहत अनुच्छेद 351 में यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसके रूप में मुख्य रूप से संस्कृत के साथ-साथ देश की अन्य भाषाओं की शब्दावली को भी आत्मसात करे। 3. वर्ष 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसके तहत दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्हता (Disqualification) से संबंधित उपबंध किए गए हैं, और इस अनुसूची के अंतर्गत दलबदल से जुड़े किसी विवाद पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी (सभापति या अध्यक्ष) के पास होती है, जिसका न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संबंधों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को किसी राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा करने की शक्ति प्राप्त नहीं होती है, भले ही वह मामला राज्य विधि के अंतर्गत ही क्यों न आया हो। 2. अनुच्छेद 167 के अनुसार, राज्य के मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर राज्य के प्रशासन से संबंधित जानकारी और विधายक प्रस्तावों की सूचना भी उपलब्ध कराए। 3. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अंतर्गत छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातीय कल्याण के लिए पृथक् से एक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, और इसके साथ ही बिहार राज्य को भी इस विशेष प्रावधान के अंतर्गत शामिल किया गया था, जिसे बाद में 94वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2006 द्वारा इस अनिवार्य सूची से हटा दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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