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Indian Polity
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भारत में चुनाव सुधारों, चुनावी बांड (Electoral Bonds) योजना के कानूनी घटनाक्रम और भारतीय निर्वाचन आयोग की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 'एस.ए. जैकब बनाम भारत संघ' या 'एडीआर (Association for Democratic Reforms) बनाम भारत संघ (2024)' के ऐतिहासिक निर्णय में चुनावी बांड योजना को पूरी तरह से असंवैधानिक घोषित करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह योजना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों के सूचना के अधिकार (Right to Information) का उल्लंघन करती है क्योंकि यह राजनीतिक दलों को मिलने वाले वित्तपोषण में अनाम (Anonymous) वित्तपोषण को बढ़ावा देती है।
- 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29-A के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण की शक्ति तो प्राप्त है, किंतु एक बार किसी राजनीतिक दल का विधिवत पंजीकरण हो जाने के पश्चात आयोग के पास उस पंजीकरण को रद्द करने या वापस लेने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं है, सिवाय उस स्थिति के जब दल ने पंजीकरण प्राप्त करते समय धोखाधड़ी या कूट रचित दस्तावेजों का सहारा लिया हो।
- 3. निर्वाचन आयोग द्वारा राजनैतिक दलों के लिए अपने चुनावी खर्चों का विवरण चुनाव परिणाम घोषित होने की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर (मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों के लिए) प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है, और आयोग को यह शक्ति प्राप्त है कि वह चुनाव खर्चों की सीमा का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A के तहत अधिकतम छह वर्ष की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य (Disqualify) घोषित कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने एडीआर (ADR) मामले में चुनावी बांड योजना को नागरिकों के सूचना के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के विरुद्ध मानते हुए रद्द कर दिया था। कथन 2 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, निर्वाचन आयोग को दलों के पंजीकरण को रद्द करने की अप्रत्यक्ष या विशिष्ट परिस्थितियों (जैसे आंतरिक लोकतंत्र का पूर्ण उल्लंघन या संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लंघन) में शक्ति प्राप्त है, और सुप्रीम कोर्ट ने 'इंडियन नेशनल कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर' मामले में यह माना था कि आयोग के पास धोखाधड़ी से प्राप्त पंजीकरण को रद्द करने की शक्ति है, किंतु व्यापक संदर्भ में यह कथन पूर्णतः सत्य नहीं है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें। कथन 3 सही है क्योंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A के तहत चुनाव खर्च का सही हिसाब न देने या सीमा का उल्लंघन करने पर आयोग उम्मीदवारों को अधिकतम 6 वर्ष के लिए अयोग्य ठहरा सकता है।
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, '1773 के रेगुलेटिंग एक्ट' (Regulating Act of 1773) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसमें पहले गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे।
2. इस अधिनियम के अंतर्गत कलकत्ता के फोर्ट विलियम में वर्ष 1774 में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे, तथा इस न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध सीधे प्रिवी काउंसिल में अपील की जा सकती थी।
3. इस अधिनियम ने कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने और भारतवासियों से किसी भी प्रकार की रिश्वत या उपहार लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जिससे कंपनी के प्रशासन पर ब्रिटिश संसदीय नियंत्रण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और अंग्रेजी भाषा को इस अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है।
2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संविधान लागू होने के पंद्रह वर्ष की अवधि (अर्थात 1965 तक) तक सभी सरकारी कार्यों के लिए केवल अंग्रेजी का ही प्रयोग किया जाना अनिवार्य था और हिंदी का प्रयोग प्रतिबंधित था।
3. वर्ष 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसे 'दल-बदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) कहा जाता है, और इसके अंतर्गत यदि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई निर्वाचित सदस्य अपने राजनीतिक दल की इच्छा के विरुद्ध सदन में मतदान करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है और दल द्वारा पंद्रह दिन के भीतर उसकी इस कृत्य को माफ नहीं किया जाता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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मानव शरीर में विटामिन A कहाँ भंडारित होता है?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधान परिषद' के गठन, संरचना, और धन विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में इसकी कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं हो सकती है।
3. विधान परिषद के पास किसी साधारण विधेयक को अधिकतम चार महीने तक रोकने की शक्ति होती है, जबकि धन विधेयक के मामले में विधान परिषद के पास केवल 14 दिनों की देरी करने की शक्ति होती है, जिसके बाद वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, भले ही विधान परिषद ने उसे अस्वीकार क्यों न कर दिया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) के गठन, संरचना, और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे, और ऐसा संकल्प पारित होने पर संसद के लिए उस राज्य में विधान परिषद का सृजन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवाद स्वरूप जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक संदर्भ)।
3. राज्य विधानसभा के विपरीत, विधान परिषद एक स्थायी सदन है जो कभी विघटित नहीं होता है, और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, तथा विधान परिषद के सभापति और उपसभापति का निर्वाचन केवल परिषद के मनोनीत सदस्यों में से ही किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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