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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत भारतीय नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो वह अनुच्छेद 8 के अंतर्गत स्वतः भारत का नागरिक बना रहता है जब तक कि संसद विधि द्वारा उसकी नागरिकता समाप्त करने का औपचारिक आदेश पारित न कर दे।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1957 (मूल रूप से नागरिकता अधिनियम, 1955) के अंतर्गत जन्म से नागरिकता के प्रावधान में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं, जिसके तहत 3 जनवरी 1992 के पश्चात भारत में जन्मे किसी भी व्यक्ति को जन्म से भारतीय नागरिक तभी माना जाएगा जब उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक हो।
- 3. वर्ष 2019 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के उन प्रवासियों को भारत की अवैध प्रवासी श्रेणी से छूट प्रदान की गई है जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके थे, तथा इस अधिनियम के प्रावधान देश के संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों तथा 'इनर लाइन परमिट' (ILP) प्रणाली के अंतर्गत आने वाले राज्यों पर लागू नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो वह स्वतः भारत का नागरिक नहीं रहता (अर्थात उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है), इसके लिए संसद द्वारा किसी पृथक आदेश की आवश्यकता नहीं होती। कथन 2 सत्य है; नागरिकता अधिनियम, 1955 में 1992 के संशोधन के पश्चात यह अनिवार्य कर दिया गया कि 3 दिसंबर 1992 या उसके बाद भारत में जन्मे व्यक्ति के माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। कथन 3 पूर्णतः सत्य है; नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत छह निर्दिष्ट समुदायों के प्रवासियों को राहत दी गई है, किंतु यह प्रावधान संविधान की छठी अनुसूची के क्षेत्रों और इनर लाइन परमिट (ILP) वाले राज्यों पर लागू नहीं होता है। भारतीय संविधान के इन व्यापक अनुच्छेदों और संशोधनों के बारे में अधिक जानने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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